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Wednesday, August 5, 2026
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छात्र प्रदर्शनों पर सुप्रीम कोर्ट की दो टूक, कहा- सुरक्षा बल संयम बरतें, हिंसक जवाब से हालात बिगड़ेंगे

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सुप्रीम कोर्ट ने छात्र प्रदर्शनों पर सुनवाई के दौरान सुरक्षा बलों को संयम बरतने की सलाह दी। अदालत ने कहा कि हिंसक प्रतिक्रिया से हालात बिगड़ सकते हैं और सभी संबंधित याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में चल रहे छात्र प्रदर्शनों के दौरान प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों को संयम बरतने की सलाह दी है। अदालत ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि युवा प्रदर्शनकारियों से निपटने में अधिकारियों को बेहद सावधानी बरतनी चाहिए। अदालत का मानना है कि हिंसा को रोकने के लिए बल प्रयोग या हिंसक प्रतिक्रिया देने से हालात सुधरने के बजाय और बिगड़ सकते हैं।

यह टिप्पणी भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने उस याचिका पर सुनवाई के दौरान की, जिसमें कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के खिलाफ हालिया छात्र आंदोलनों के दौरान हुई कथित हिंसा और पथराव को लेकर सख्त कार्रवाई की मांग की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि दिल्ली और अन्य राज्यों में हुए प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा के लिए संगठन के नेताओं की भूमिका की जांच की जानी चाहिए।

सभी संबंधित याचिकाओं पर होगी एक साथ सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि छात्र आंदोलनों और उनसे जुड़ी हिंसा से संबंधित सभी लंबित याचिकाओं की अब एक साथ सुनवाई की जाएगी। अदालत ने इस मामले को दिल्ली और अन्य राज्यों में हुई घटनाओं से जुड़ी पहले से लंबित याचिकाओं के साथ जोड़ दिया है, ताकि सभी पहलुओं पर एक साथ विचार किया जा सके।

‘लोकतंत्र में सबसे बड़ी ताकत सुनना है’

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन एक महत्वपूर्ण अधिकार है और ऐसे मामलों में प्रशासन को धैर्य और संवेदनशीलता के साथ काम करना चाहिए।

पीठ ने कहा, “लोकतंत्र में ऐसे शांतिपूर्ण मार्च के दौरान सुरक्षा बलों को भी संयम बरतना चाहिए। अधिकारियों को बहुत सावधानी से कदम उठाने की जरूरत है ताकि युवा हिंसा में शामिल न हों। हिंसक प्रतिक्रिया से स्थिति और खराब हो सकती है। सबसे बड़ी ताकत सुनना है—यह समझना कि वे क्या कह रहे हैं और क्यों आंदोलन कर रहे हैं।”

कानून प्रवर्तन एजेंसियों पर जताया भरोसा

अदालत ने यह भी कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना संबंधित एजेंसियों की जिम्मेदारी है और उन्हें परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लेने दिया जाना चाहिए।

पीठ ने कहा, “आइए इसे कानून प्रवर्तन एजेंसियों के विवेक पर छोड़ दें। वे हमसे बेहतर जानते हैं कि स्थिति से कैसे निपटना है। हमने आपकी दलीलें सुन ली हैं। तय तारीख पर मामले पर विस्तार से सुनवाई करेंगे और केंद्र सरकार सहित अन्य पक्षों का रुख भी जानेंगे।”

याचिका में क्या कहा गया है?

यह मामला वायुसेना के कुछ सेवानिवृत्त अधिकारियों की ओर से दायर याचिका से जुड़ा है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि CJP नेताओं के कुछ सार्वजनिक बयानों से माहौल भड़काने की कोशिश हुई। याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील ने अदालत में कहा कि आंदोलन के दौरान हुई कथित हिंसा और अव्यवस्था के लिए आयोजकों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।

वकील ने अदालत से कहा कि राष्ट्रीय राजधानी के उच्च सुरक्षा क्षेत्र में हुई घटनाओं के कई दिन बाद भी कथित आयोजक सार्वजनिक मंचों पर बयान दे रहे हैं। उन्होंने अदालत से मांग की कि हिंसा के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ भी कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने मामले में कोई अंतिम आदेश पारित नहीं किया है। अदालत ने सभी संबंधित याचिकाओं को एक साथ सुनने का फैसला करते हुए अगली सुनवाई में केंद्र सरकार और अन्य पक्षों से जवाब मांगा है।

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