मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा उपचुनाव में हार के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बड़ा संगठनात्मक फैसला लिया है। पार्टी ने दतिया जिले की पूरी संगठनात्मक समिति को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया है। यह निर्णय उपचुनाव के नतीजों की समीक्षा के बाद प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के निर्देश पर लिया गया।
भाजपा की ओर से जारी आदेश के मुताबिक दतिया जिले के सभी पदाधिकारियों, जिला कार्यसमिति, मंडल, मोर्चा, प्रकोष्ठ, प्रकल्प, विभाग और अन्य संगठनात्मक इकाइयों को तत्काल प्रभाव से उनके दायित्वों से मुक्त कर दिया गया है।
समीक्षा समिति की रिपोर्ट के बाद लिया गया फैसला
प्रदेश कार्यालय मंत्री श्याम महाजन की ओर से जिला अध्यक्ष रघुवीर सिंह कुशवाह को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि दतिया विधानसभा उपचुनाव के परिणामों की समीक्षा के लिए गठित समिति की अनुशंसा के आधार पर यह कार्रवाई की गई है।
पत्र में कहा गया है कि प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के निर्देशानुसार भाजपा, जिला दतिया की वर्तमान संगठनात्मक संरचना तत्काल प्रभाव से भंग की जाती है। इसके तहत जिला अध्यक्ष, जिला पदाधिकारी, जिला कार्यसमिति, मंडल, मोर्चा, प्रकोष्ठ, प्रकल्प और विभाग सहित सभी संगठनात्मक इकाइयों को पदमुक्त किया गया है।
दतिया उपचुनाव में कांग्रेस ने दर्ज की जीत
सोमवार को घोषित दतिया विधानसभा उपचुनाव के परिणाम में कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह ने भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी को 6,016 वोटों से हराया। घनश्याम सिंह को 66,757 वोट, जबकि आशुतोष तिवारी को 60,741 वोट मिले।
वहीं, आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के उम्मीदवार दामोदर यादव ‘मंडल’ को 22,527 वोट मिले और वे तीसरे स्थान पर रहे।
हालांकि कांग्रेस ने सीट बरकरार रखी, लेकिन पिछले विधानसभा चुनाव की तुलना में उसकी जीत का अंतर कम हो गया। वर्ष 2023 के चुनाव में कांग्रेस ने यह सीट 7,742 वोटों से जीती थी, जबकि इस बार जीत का अंतर घटकर 6,016 वोट रह गया।
दतिया विधानसभा सीट पर उपचुनाव इसलिए कराया गया क्योंकि कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की विधानसभा सदस्यता समाप्त हो गई थी। सहकारी ग्रामीण विकास बैंक से जुड़े एक मामले में अदालत से सजा मिलने के बाद उनकी सदस्यता रद्द कर दी गई थी, जिसके चलते यह सीट खाली हो गई।
टिकट बदलने पर हुआ था विरोध
भाजपा ने इस उपचुनाव में पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा की जगह आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया था। टिकट बदलने के फैसले के बाद पार्टी के भीतर नाराजगी खुलकर सामने आई थी। कई कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन, चक्काजाम और तोड़फोड़ भी की थी, जिसके बाद पुलिस ने कुछ लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था।
बाद में नरोत्तम मिश्रा ने स्वयं कार्यकर्ताओं से आशुतोष तिवारी के समर्थन की अपील की थी। उन्होंने चुनाव प्रचार में सक्रिय भूमिका निभाते हुए हर घर जाकर वोट मांगने की बात कही थी। इसके बावजूद भाजपा को सीट बचाने में सफलता नहीं मिली।

















