ग्वालियर शहर की खराब सड़कों को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने सरकारी व्यवस्था पर नाराजगी जताई।
कोर्ट ने सड़क निर्माण में इस्तेमाल होने वाले सरकारी धन और काम की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठाए। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर सड़क निर्माण के लिए पैसा आया और उसका अपेक्षित इस्तेमाल नहीं हुआ तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।
कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि जब प्रदेश में डबल इंजन की सरकार है, तब ग्वालियर जैसे प्रमुख शहर की सड़कों की हालत इतनी खराब क्यों है।
अब अचानक लिया जाएगा सड़क का सैंपल
हाईकोर्ट ने सड़क निर्माण की गुणवत्ता जांच को लेकर एक ऐसी प्रक्रिया तय की है, जिससे संबंधित अधिकारियों या ठेकेदारों को पहले से तैयारी करने का मौका न मिले।
कोर्ट के निर्देश के मुताबिक 30 अगस्त, 3 सितंबर और 6 सितंबर को अलग-अलग सड़कों से सैंपल लिए जाएंगे।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जिस सड़क से सैंपल लिया जाना है, उसकी जानकारी संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों को सैंपलिंग से केवल 30 मिनट पहले दी जाएगी।
इस व्यवस्था का उद्देश्य सड़क की वास्तविक स्थिति सामने लाना है। इससे सैंपल लिए जाने से पहले सड़क पर किसी तरह की लीपापोती या सुधार करने की संभावना कम होगी।
मौके पर विशेषज्ञ भी रहेंगे मौजूद
सैंपलिंग की प्रक्रिया के दौरान वकीलों के विशेष जांच आयोग के साथ तकनीकी विशेषज्ञों की टीम भी मौजूद रहेगी।
मौके पर लिए गए सड़क के सैंपल को तत्काल सील किया जाएगा। इसके बाद उसे निष्पक्ष प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा जाएगा।
इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य यह पता लगाना है कि सड़क निर्माण में निर्धारित गुणवत्ता मानकों का पालन हुआ है या नहीं।
रिपोर्ट में गड़बड़ी मिली तो होगी कड़ी कार्रवाई
हाईकोर्ट ने साफ संकेत दिया है कि सड़क की गुणवत्ता में अनियमितता पाए जाने पर जिम्मेदारी तय की जाएगी।
यदि लैब जांच या अन्य जांच में निर्माण सामग्री और सड़क की गुणवत्ता में गड़बड़ी सामने आती है, तो संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
मामले की गंभीरता के आधार पर सिविल कार्रवाई के साथ आपराधिक मुकदमा दर्ज करने की संभावना भी जताई गई है।
इससे सड़क निर्माण से जुड़े अधिकारियों और ठेकेदारों की जवाबदेही बढ़ सकती है।
लंबे समय से खराब हैं शहर की सड़कें
ग्वालियर में कई सड़कों की खराब हालत को लेकर लंबे समय से शिकायतें सामने आती रही हैं। बारिश के बाद कई जगह गड्ढे और जलभराव की समस्या और बढ़ जाती है।
स्थानीय लोग लगातार सड़क निर्माण और मरम्मत की मांग करते रहे हैं। जनहित याचिका के जरिए भी शहर की सड़कों की स्थिति का मुद्दा हाईकोर्ट तक पहुंचा।
अब हाईकोर्ट की निगरानी में होने वाली सैंपलिंग से यह पता चलेगा कि सड़क निर्माण में इस्तेमाल सामग्री और निर्माण कार्य तय मानकों के अनुरूप है या नहीं।

















