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Friday, August 7, 2026
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इंदौर कलेक्ट्रेट में ‘ठग’ कर्मचारी! भरोसे की आड़ में 17 लाख का फर्जीवाड़ा, इंदौर कलेक्टर की बड़ी कार्रवाई

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इंदौर। कलेक्टर कार्यालय में पदस्थ एक कर्मचारी पर सरकारी पद का दुरुपयोग कर और भरोसे की आड़ में प्लॉट दिलाने के नाम पर 17 लाख रुपये ऐंठने का गंभीर मामला सामने आया है। मामला उजागर होने और जनसुनवाई में पुख्ता प्रमाणों के साथ शिकायत मिलने पर कलेक्टर शिवम वर्मा ने आरोपी कर्मचारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित करते हुए विभागीय जांच के आदेश जारी कर दिए हैं।

क्या है पूरा मामला?

पंचमूर्ति नगर निवासी पीड़ित मनोज शर्मा के अनुसार, उन्हें प्लॉट की आवश्यकता थी। एक परिचित के माध्यम से उनकी मुलाकात कलेक्टर कार्यालय की भूमि संसाधन प्रबंधन शाखा में पदस्थ भृत्य (चेनमैन) कैलाश पालीवाल से हुई। पालीवाल ने खुद को चंदन नगर चौराहे के पास स्थित एक प्लॉट का मालिक बताते हुए मनोज शर्मा के साथ 20 लाख रुपये में सौदा तय किया। पीड़ित ने सरकारी कर्मचारी पर भरोसा करते हुए अलग-अलग किश्तों में कुल 17 लाख रुपये दे दिए।

रजिस्ट्री में टालमटोल और जांच में खुला फर्जीवाड़ा

रकम वसूलने के बाद जब पालीवाल रजिस्ट्री कराने में टालमटोल करने लगा, तो पीड़ित को शक हुआ। मनोज शर्मा द्वारा जानकारी जुटाने पर पता चला कि जिस प्लॉट का सौदा किया गया था, वह पालीवाल के नाम पर था ही नहीं। ठगी का अहसास होने पर जब पीड़ित ने अपना सौदा रद्द कर रकम वापस मांगी, तो विवाद बढ़ गया। आरोप है कि आरोपी कर्मचारी ने पीड़ित के साथ अश्लील अभद्रता की और शासकीय पद की धौंस दिखाते हुए झूठे केस में फंसाने, जेल भिजवाने तथा जान से मारने की धमकी तक दे डाली।

जनसुनवाई में शिकायत और कलेक्टर का कड़ा एक्शन

पीड़ित मनोज शर्मा ने हार न मानते हुए रुपयों के लेन-देन के वीडियो और फोन पर हुई बातचीत की रिकॉर्डिंग के सबूतों के साथ कलेक्टर शिवम वर्मा की जनसुनवाई में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत और प्रस्तुत साक्ष्यों को प्रथम दृष्टया गंभीर मानते हुए कलेक्टर शिवम वर्मा ने मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के तहत कैलाश पालीवाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।

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