छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग में 23 जनवरी, शुक्रवार को बसंत पंचमी उत्सव धूमधाम से मनाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत द्वीप प्रज्ज्वलन एवं सरस्वती वंदना से की गई। उत्सव के दौरान कई प्रतियोगिताओं का आयोजन भी किया गया। प्रतियोगिताओं में भजन गायन, क्राफ्ट मेकिंग, क्ले मेकिंग, काइट मेकिंग एवं बुके मेकिंग को शामिल किया गया।
सर्वप्रथम भजन गायन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें विभाग के विद्यार्थियों ने भजन गायन कर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर विश्वविद्यालय के शिक्षा विभाग से डॉ.रश्मि गोरे उपस्थित थी। डॉ.रश्मि गोरे ने सभी प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि रचनात्मकता ही आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देता है। अगर आपकी सोच रचनात्मक है तो निश्चित ही आप आत्मनिर्भरता की दिशा में हैं। पत्रकारिता एवं जनसंचार के छात्रों को रचनात्मक होना अनिवार्य है, रचनात्मक शैली से ही आप अच्छे पत्रकार बन सकते हैं।
प्रतियोगिताओं के निर्णायक के तौर पर शिक्षा विभाग से रत्नार्तुह मिश्रा उपस्थित थीं। सभी प्रतियोगिताओं में समयसीमा, अनुशासन, थीम और रचनात्मकता के आधार पर प्रतिभागियों का मूल्यांकन किया गया।

विभागाध्यक्ष डॉ दिवाकर अवस्थी ने मीडिया को जानकारी देते हुए कहा कि इस कार्यक्रम में विभाग के सभी छात्रों ने बढ़ चढ़कर सहभागिता किया है। सभी प्रतियोगिताओं के बाद विजेता प्रतिभागियों के नाम की घोषणा की गई। जिसमें भजन गायन में जयंत शर्मा ने प्रथम स्थान, अंशिका ने द्वितीय स्थान एवं प्रवीण कुमार और वैष्णवी त्रिपाठी ने संयुक्त रूप से तृतीय स्थान प्राप्त किया।
बुके मेकिंग में प्रिया यादव प्रथम, श्रष्टि जायसवाल द्वितीय एवं अली हसन व आस्था संयुक्त रूप से तृतीय स्थान पर रहे। काइट पेंटिंग में वंशिका पाल प्रथम, पुनीत सिंह द्वितीय एवं ख्याति अवस्थी तृतीय स्थान पर रहीं। क्ले मॉडलिंग में मिस्ठी सिन्हा प्रथम, नेहा वर्मा द्वितीय शाम्भवी तृतीय स्थान पर रहीं। क्राफ्ट मेकिंग प्राची द्विवेदी एकमात्र विजेता रहीं। सभी विजेता छात्र छात्राओं को विभाग द्वारा पुरस्कृत किया गया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ हरिओम कुमार ने किया। इस अवसर पर सहायक विभागाध्यक्ष डॉ ओम शंकर गुप्ता, सह आचार्य डॉ योगेंद्र पांडेय, सहायक आचार्य डॉ जितेंद्र डबराल, डॉ रश्मि गौतम, सागर कनौजिया एवं विभाग के सभी छात्र छात्राएं उपस्थित रहे ।



















