नई दिल्ली। संसद मार्च के बीच जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन से जुड़ी एक अहम खबर सामने आई है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) से जुड़े आंदोलन के समर्थन में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे तीन छात्र कार्यकर्ताओं ने सोमवार को अपना अनशन समाप्त कर दिया। इन तीनों ने लगातार 23 दिनों तक भोजन का त्याग किया था। अब सभी की निगाहें जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक पर टिकी हैं, जो फिलहाल दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती हैं।
जानकारी के अनुसार, अनशन समाप्त करने वाले छात्रों में नेहा, मनीष और आमीन शामिल हैं। तीनों ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) से जुड़े हैं। बताया जा रहा है कि विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक हस्तियों की अपील के बाद उन्होंने अपना अनशन समाप्त करने का निर्णय लिया।
23 दिनों में स्वास्थ्य पर पड़ा असर
AISA का कहना है कि 23 दिनों तक चले अनिश्चितकालीन अनशन के दौरान तीनों छात्रों के शरीर का वजन 12 प्रतिशत से अधिक कम हो गया था। संगठन के मुताबिक, रक्त शर्करा (ब्लड शुगर) का स्तर काफी नीचे पहुंचने और स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याओं के बावजूद तीनों ने अपना विरोध जारी रखा।
छात्र संगठन ने घोषणा की है कि अब वह संसद के मानसून सत्र के दौरान और उसके बाद देशभर में एक महीने तक अभियान चलाएगा। इस अभियान में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) और राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के खिलाफ विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
क्या थीं आंदोलनकारियों की मांगें?
AISA के कार्यकर्ता 28 जून से जंतर-मंतर पर चल रहे व्यापक आंदोलन के तहत भूख हड़ताल पर बैठे थे। उनकी प्रमुख मांगों में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की न्यायिक जांच और शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार शामिल हैं।
सोनम वांगचुक ने अनशन खत्म करने की रखीं शर्तें
इस बीच, जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने संकेत दिए हैं कि यदि सरकार परीक्षा से जुड़े कथित घोटालों और प्रश्नपत्र लीक जैसे मामलों में जवाबदेही तय करने की दिशा में कदम उठाती है, तो वह अपना अनशन समाप्त करने पर विचार करेंगे।
वांगचुक ने कहा कि यदि संसद तक पहुंचने के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसद उन्हें यह भरोसा दिलाते हैं कि इस मुद्दे को संसद में प्रभावी ढंग से उठाया जाएगा, तो वह अपना अनशन समाप्त कर देंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि स्वास्थ्य कारणों से वह संसद तक नहीं पहुंच पाते हैं, तो विभिन्न दलों के सांसद और नेता सफदरजंग अस्पताल पहुंचकर उन्हें यही आश्वासन दें। इसके साथ ही वांगचुक ने आरोप लगाया कि उन्हें अस्पताल में उनकी इच्छा के विरुद्ध रखा गया है। हालांकि, इस आरोप पर संबंधित अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
उधर, सरकार की ओर से अब तक वांगचुक की शर्तों या आंदोलनकारियों की मांगों पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।















