बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के बिगुल के साथ ही चुनावी वादों की लड़ाई तेज हो गई है। शुक्रवार को एनडीए ने अपना घोषणापत्र जारी करते हुए इसे ‘संकल्प पत्र’ नाम दिया। इससे दो दिन पहले महागठबंधन भी अपना घोषणा पत्र ‘तेजस्वी प्रण’ जारी कर चुका है। दोनों ही गठबंधनों ने लगभग 25 बड़े वादे किए हैं, जिसमें फ्री बिजली से लेकर पेंशन, नौकरी और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे मुद्दों को बड़ा स्थान दिया गया है। अब मुकाबला नारों और चेहरों से आगे बढ़कर सीधे रोजगार vs विकास मॉडल पर आ गया है।
एनडीए का कहना है कि बिहार को आने वाले सालों में ग्लोबल स्किल हब और औद्योगिक शक्ति केंद्र बनाया जाएगा। जबकि महागठबंधन रोजगार, पेंशन और आउटसोर्सिंग खत्म करने जैसे वादों को केंद्र में रख रहा है। इन घोषणाओं के बाद बिहार की राजनीति में एक बार फिर चुनावी बहस तेज हो गई है कि जनता किस मॉडल पर भरोसा जताएगी।
NDA के संकल्प पत्र की 10 बड़ी बातें
- 1 करोड़ सरकारी नौकरी और रोजगार के अवसर
- हर जिले में मेगा स्किल सेंटर
- किसानों को कर्पूरी ठाकुर सम्मान निधि के तहत सालाना ₹9,000
- बिहार में 7 एक्सप्रेसवे और 3600 किमी रेल नेटवर्क अपग्रेड
- 4 शहरों में मेट्रो सेवा
- हर घर को 125 यूनिट फ्री बिजली
- ₹5 लाख तक मुफ्त इलाज
- 50 लाख नए पक्के मकान
- महिलाओं के लिए ‘महिला मिशन करोड़पति’
- बिहार को 5 साल में बाढ़ मुक्त करने का संकल्प
महागठबंधन के ‘तेजस्वी प्रण’ की 10 बड़ी बातें
- सरकार बनते ही 20 दिनों में सरकारी नौकरी कानून
- सभी संविदाकर्मियों को स्थायी दर्जा
- पुरानी पेंशन योजना (OPS) लागू
- ‘माई-बहिन मान योजना’ के तहत महिलाओं को ₹2,500 मासिक
- हर परिवार को 200 यूनिट फ्री बिजली
- गरीब परिवारों को ₹500 में गैस सिलेंडर
- ₹25 लाख तक मुफ्त स्वास्थ्य बीमा
- प्रतियोगी परीक्षाओं के फॉर्म और यात्रा खर्च माफ
- छात्रों को कक्षा 8 से 12 तक मुफ्त टैबलेट
- शराबबंदी कानून की समीक्षा और प्रवासी मजदूर विभाग का गठन
चुनावी माहौल में दोनों घोषणा पत्रों ने स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति फ्री सुविधाओं, नौकरी और विकास को लेकर और भी तीखी होने वाली है। जनता किस मॉडल पर भरोसा करती है, यह मतदान तय करेगा।




















