दुमका के मसलिया प्रखंड में आंधी-बारिश से करेला की फसल को नुकसान पहुंचा है। तेज हवा में बांस-बल्लियों से बने मचान गिर गए और कुछ कच्चे मकानों की छतें भी उजड़ गईं। प्रभावित किसानों ने नुकसान का सर्वे कराकर आपदा प्रबंधन मद से मुआवजा देने की मांग की है।
किसान सुरेश यादव, भीम सिंह और काजल रजक समेत दर्जनों किसानों की फसल प्रभावित हुई है। किसानों का कहना है कि फसल पर निर्भर उनकी आजीविका पर भी इसका असर पड़ा है। मकानों की छतें उजड़ने से वहां रहने वाले परिवारों को भी परेशानी हो रही है।
फसल नुकसान और गिरते दाम से चिंता
किसानों के मुताबिक, वे अगस्त से दिसंबर तक करेला तोड़कर बाजार में बेचते थे और इस उपज से उन्हें आमदनी होती थी। मचान गिरने और फसल खराब होने से इस बार उनकी मेहनत और अपेक्षित कमाई पर असर पड़ा है।
फसल नुकसान के बीच करेला के दाम गिरने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, बाजार में करेला फिलहाल 8 से 10 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। कुछ दिन पहले इसकी कीमत 70 से 80 रुपये प्रति किलो बताई गई थी। किसानों के मुताबिक, फसल का नुकसान होने के साथ बची हुई उपज से होने वाली कमाई भी घट गई है।
सर्वे और मुआवजे की मांग
प्रभावित किसानों ने खेतों और मकानों को हुए नुकसान का आकलन कराने की मांग की है। उनकी अपील है कि सर्वे के बाद पात्र लोगों को आपदा प्रबंधन मद से उचित मुआवजा दिया जाए। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, प्रशासन की ओर से सर्वे या मुआवजे पर कोई निर्णय सामने नहीं आया है।




















