कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने छात्र आंदोलन खत्म होने के बाद एक बार फिर सरकार को चेतावनी दी है। इस बार संगठन के प्रमुख अभिजीत दीपके ने कहा है कि अगर पुलिस की ओर से छात्रों को परेशान करने का सिलसिला जारी रहा तो CJP जल्द ही बड़ा और शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन करेगी। उनका बयान ऐसे समय आया है, जब संगठन लगातार प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों और पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठा रहा है।
अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी पोस्ट में कहा कि सरकार को छात्रों को निशाना बनाना बंद करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कई जगहों पर आंदोलन में शामिल छात्रों को परेशान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि यह कार्रवाई नहीं रुकी, तो CJP बड़े स्तर पर आंदोलन करने को मजबूर होगी।
‘आंदोलन खत्म नहीं, सिर्फ पहला चरण पूरा हुआ’
दीपके ने साफ किया कि आंदोलन वापस लेने का मतलब यह नहीं है कि संगठन का अभियान समाप्त हो गया है। उन्होंने कहा कि CJP का सफर अभी लंबा है और हालिया विरोध-प्रदर्शन केवल शुरुआत थी। उनके मुताबिक, संगठन आगे भी युवाओं से जुड़े मुद्दों पर आवाज उठाता रहेगा।
प्रदर्शनकारियों को मिलेगी कानूनी मदद
इससे पहले CJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता सौरव दास ने भी कहा था कि संगठन शिक्षा और शासन व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर अभियान जारी रखेगा। उन्होंने बताया था कि आंदोलन से जुड़े मामलों में कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के लिए वरिष्ठ अधिवक्ताओं से संपर्क किया गया है।
सौरव दास ने यह भी घोषणा की थी कि देशभर के छात्रों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के लिए एक ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया जाएगा। इस पोर्टल के माध्यम से प्रदर्शनकारियों को वकीलों से जोड़ा जाएगा और जरूरत पड़ने पर कानूनी मदद उपलब्ध कराई जाएगी।
‘साक्षी’ पोर्टल पर जुटाए जाएंगे सबूत
CJP ने ‘साक्षी’ नाम से एक अलग पोर्टल शुरू करने की भी घोषणा की है। संगठन का कहना है कि इस पोर्टल पर प्रदर्शन के दौरान हुई कथित पुलिस कार्रवाई से जुड़े वीडियो, तस्वीरें और अन्य साक्ष्य अपलोड किए जा सकेंगे। CJP का दावा है कि उसकी कानूनी टीम इन मामलों की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करेगी।
आशुतोष रांका भी दे चुके हैं चेतावनी
सोमवार को CJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने भी सरकार को चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा था कि यदि मंगलवार तक प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने और आगे कोई कार्रवाई नहीं करने का लिखित आश्वासन नहीं मिला, तो संगठन दोबारा आंदोलन शुरू करेगा। उन्होंने हिरासत में लिए गए लोगों की तत्काल रिहाई की भी मांग की थी।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
इस बीच, सुप्रीम कोर्ट ने छात्रों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगाने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि 18 वर्ष से कम उम्र के ऐसे लोगों को रिहा किया जाए, जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। साथ ही अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन्होंने कानून अपने हाथ में लिया है या हिंसा की है, उनके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
















