बिहार चुनाव के नतीजों के बाद भाजपा ने पूर्व केंद्रीय मंत्री आरके सिंह को पार्टी से छह साल के लिए निलंबित कर दिया है। पार्टी ने इसके लिए आधिकारिक चिट्ठी जारी की है। आरके सिंह लंबे समय से बीजेपी लाइन से हटकर बयान दे रहे थे और चुनाव से पहले उन्होंने एनडीए उम्मीदवारों पर सीधे सवाल उठाए थे। इसी कारण पार्टी हाईकमान उनके खिलाफ कड़ा कदम उठाने को मजबूर हुआ।
सम्राट चौधरी पर हत्या का आरोप
आरके सिंह ने डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी, जेडीयू के अनंत सिंह और आरजेडी के सूरजभान सिंह को “हत्या का आरोपी” बताते हुए वोट न देने की अपील की थी। उन्होंने फेसबुक पर लिखा था कि ऐसे लोगों को वोट देने से अच्छा है चुल्लू भर पानी में डूब मरना। उनके इस बयान ने चुनाव के बीच सियासी गलियारों में तीखी प्रतिक्रिया पैदा कर दी थी।
बिजली घोटाला और अडाणी पावर पर गंभीर आरोप
दीवाली पर आरके सिंह ने फेसबुक पोस्ट में नीतीश सरकार पर 62 हजार करोड़ के बिजली घोटाले का आरोप लगाया था। उनके अनुसार बिहार सरकार ने अडाणी पावर लिमिटेड के साथ 25 साल के लिए जो बिजली खरीद समझौता किया है, वह जनता के साथ “सीधा धोखा” है। उन्होंने दावा किया कि सरकार 6.75 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली खरीद रही है, जबकि मौजूदा दर इससे काफी कम है।
NTPC की जगह प्राइवेट कंपनी क्यों?
आरके सिंह ने कहा कि यह प्रोजेक्ट पहले NTPC को दिया जाना था और केंद्र सरकार ने बजट में इसकी घोषणा भी कर दी थी। उन्होंने सवाल उठाया कि फिर अचानक फैसला क्यों बदला गया? क्या किसी प्राइवेट कंपनी को फ़ायदा पहुंचाने के लिए ऐसा किया गया? उनके मुताबिक प्लांट की लागत 9 करोड़ रुपए प्रति मेगावॉट आती है, लेकिन प्राइवेट कंपनी को अधिक दर पर काम सौंपा गया।
पूर्व मंत्री ने सोशल मीडिया पर दस्तावेज़ शेयर करते हुए दावा किया कि जिस दर से फिक्स चार्ज तय किया गया है, वह वास्तविक लागत से 1.84 रुपये प्रति यूनिट ज्यादा है। उन्होंने इसे बड़ा घोटाला बताते हुए कहा कि भ्रष्टाचार पर चुप नहीं रहा जा सकता।

















