40.6 C
Indore
Friday, May 15, 2026
Homeअंतर्राष्ट्रीयहॉर्मुज संकट का भारत पर असर, कच्चे तेल का भंडार 15% घटा,...

हॉर्मुज संकट का भारत पर असर, कच्चे तेल का भंडार 15% घटा, रिपोर्ट में दावा- सिर्फ 18 दिन का तेल भंडार

Date:

अमेरिका-ईरान युद्ध और हॉर्मुज स्ट्रेट बंद होने का असर अब भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर दिखने लगा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक देश के कच्चे तेल के भंडार में करीब 15 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है, जबकि सरकार और विश्लेषकों के आंकड़ों में अंतर भी सामने आया है।

अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष का असर अब भारत के तेल भंडार पर भी साफ दिखाई देने लगा है। फरवरी के अंत में शुरू हुए युद्ध और हॉर्मुज स्ट्रेट के बंद होने के बाद भारत के कच्चे तेल के स्टॉक में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। कमोडिटी एनालिटिक्स फर्म केप्लर के अनुसार पिछले ढाई महीनों में भारत का सुरक्षित तेल भंडार लगभग 15 प्रतिशत घट गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक युद्ध शुरू होने से पहले भारत रोजाना करीब 5 मिलियन बैरल कच्चा तेल आयात कर रहा था, लेकिन अब यह घटकर औसतन 4.5 मिलियन बैरल प्रतिदिन रह गया है। आयात में कमी के बावजूद भारतीय रिफाइनरियां सामान्य क्षमता पर काम करती रहीं, जिसकी वजह से स्टोरेज में रखा तेल तेजी से कम हुआ।

रिफाइनरियों पर बढ़ सकता है दबाव

केप्लर के विश्लेषकों का मानना है कि यदि सप्लाई में रुकावट लंबे समय तक जारी रही तो भारतीय रिफाइनरियों को तेल प्रोसेसिंग घटानी पड़ सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार मौजूदा स्थिति को देखते हुए ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल में देशवासियों से ईंधन बचाने की अपील की थी।

तेल संकट से जुड़े प्रमुख आंकड़ेविवरण
युद्ध से पहले आयात5 मिलियन बैरल प्रतिदिन
वर्तमान आयात4.5 मिलियन बैरल प्रतिदिन
फरवरी में तेल भंडार107 मिलियन बैरल
वर्तमान भंडार91 मिलियन बैरल
अनुमानित खपत क्षमता18 दिन

स्टॉक को लेकर अलग-अलग दावे

केप्लर की रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा 91 मिलियन बैरल का भंडार भारत की जरूरत के हिसाब से लगभग 18 दिनों के लिए पर्याप्त है। हालांकि केंद्र सरकार ने इससे अलग दावा किया है।

सरकार की ओर से बताया गया कि देश के पास करीब 60 दिनों का तेल भंडार उपलब्ध है। अधिकारियों के अनुसार इस अनुमान में पाइपलाइन में मौजूद तेल और भारत की ओर आ रहे तेल से भरे जहाजों को भी शामिल किया गया है।

हॉर्मुज स्ट्रेट बंद होने से बढ़ा वैश्विक दबाव

हॉर्मुज स्ट्रेट बंद होने के कारण इराक और कुवैत जैसे देशों का तेल निर्यात प्रभावित हुआ है। वहीं सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात वैकल्पिक मार्गों से आपूर्ति बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं।

इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) के अनुसार मार्च और अप्रैल के दौरान वैश्विक तेल भंडार में भारी गिरावट दर्ज की गई है। एजेंसी ने चेतावनी दी है कि गर्मियों में मांग बढ़ने के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल कीमतों में बड़ी उथल-पुथल देखने को मिल सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया संकट जल्द खत्म नहीं हुआ तो भारत समेत कई देशों को ऊर्जा सुरक्षा और महंगाई दोनों मोर्चों पर चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।

Related Posts

spot_img

मध्य प्रदेश