महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को लेकर अब ‘दक्षिण बनाम उत्तर’ की बहस तेज हो गई है। दक्षिण भारत के कई राज्यों ने परिसीमन को लेकर चिंता जताई है और कहा है कि इससे उनके प्रतिनिधित्व पर असर पड़ सकता है।
Tamil Nadu, Kerala और Karnataka समेत कई राज्यों का कहना है कि यदि जनगणना के आधार पर परिसीमन किया गया, तो उनकी लोकसभा सीटें कम हो सकती हैं। उनका तर्क है कि जनसंख्या नियंत्रण की नीति अपनाने वाले राज्यों को इससे नुकसान होगा।
सरकार ने आशंकाओं को किया खारिज
सरकार ने इन आशंकाओं को खारिज करते हुए कहा है कि किसी भी राज्य के साथ अन्याय नहीं होगा। संसद में कानून मंत्री Arjun Ram Meghwal ने कहा कि सभी राज्यों का प्रतिनिधित्व पहले जैसा ही बना रहेगा।
उन्होंने बताया कि लोकसभा में कुल सीटों की संख्या बढ़ाकर 815 की जाएगी। इनमें से 272 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। साथ ही सभी राज्यों में सीटों की संख्या में लगभग 50 प्रतिशत तक वृद्धि की जाएगी।
इस मुद्दे पर कुछ दलों ने समर्थन के संकेत भी दिए हैं। YSR Congress Party ने कहा है कि यदि सभी राज्यों में समान रूप से सीटें बढ़ाई जाती हैं, तो उन्हें विधेयक से कोई आपत्ति नहीं होगी। पार्टी ने सरकार से परिसीमन से जुड़ी जानकारी लिखित रूप में मांगी है और स्पष्टता मिलने पर समर्थन की बात कही है।
दक्षिण भारत में भ्रम फैलाने का आरोप
वहीं Tejasvi Surya ने कहा कि दक्षिण भारत में इस मुद्दे को लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है। उनके अनुसार, परिसीमन से किसी राज्य का नुकसान नहीं होगा और सभी का प्रतिनिधित्व पहले जैसा ही रहेगा।
उन्होंने कहा कि सीटों में सीधा इजाफा किया जाएगा, जिससे किसी क्षेत्र की हिस्सेदारी कम नहीं होगी।
















