Harivansh Narayan Singh को राज्यसभा के उपसभापति पद पर लगातार तीसरी बार निर्विरोध चुना गया है। विपक्ष द्वारा कोई उम्मीदवार न उतारे जाने के कारण उनका चुनाव बिना मुकाबले पूरा हुआ और इसकी औपचारिक घोषणा गुरुवार सुबह की गई।
यह भारतीय संसदीय इतिहास में पहली बार है जब कोई मनोनीत सदस्य इस पद पर पहुंचा है। हाल ही में उन्हें राष्ट्रपति Droupadi Murmu द्वारा राज्यसभा के लिए मनोनीत किया गया था।
उपसभापति पद के लिए नामांकन की समय सीमा 16 अप्रैल को समाप्त हुई थी। इस पद के लिए केवल National Democratic Alliance की ओर से हरिवंश के नाम का प्रस्ताव आया।
सदन के नेता JP Nadda ने उनका नाम प्रस्तावित किया, जिसका समर्थन एस. फांगनोन कोन्याक सहित कई सांसदों ने किया। कुल पांच प्रस्ताव उनके समर्थन में राज्यसभा सचिवालय को प्राप्त हुए।
क्या है इस चुनाव की खास बात
हरिवंश नारायण सिंह का पिछला कार्यकाल 9 अप्रैल 2026 को समाप्त हुआ था। इसके बाद 10 अप्रैल को उन्हें फिर से राज्यसभा के लिए मनोनीत किया गया।
इस बार वे मनोनीत सदस्य के रूप में उपसभापति बने हैं, जो अब तक किसी भी नेता के साथ नहीं हुआ था। यह उनका लगातार तीसरा कार्यकाल है, जो उन्हें एक विशिष्ट स्थान देता है।
प्रधानमंत्री Narendra Modi ने राज्यसभा में उनके निर्विरोध चुनाव पर कहा कि यह सदन के उनके प्रति विश्वास का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि हरिवंश के नेतृत्व में सदन की कार्यवाही प्रभावी और संतुलित रही है।
प्रधानमंत्री ने उम्मीद जताई कि उनका नया कार्यकाल भी सदन की गरिमा को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगा।
विपक्ष का बहिष्कार
विपक्षी दलों ने इस चुनाव का बहिष्कार किया। Jairam Ramesh ने कहा कि यह विरोध किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि संसदीय परंपराओं के मुद्दे पर है।
विपक्ष का कहना है कि लोकसभा में उपाध्यक्ष का पद लंबे समय से खाली है और सरकार ने इस मामले में पर्याप्त परामर्श नहीं किया। इसी कारण उन्होंने उम्मीदवार नहीं उतारने का फैसला लिया।
हरिवंश का राजनीतिक सफर
हरिवंश नारायण सिंह पत्रकारिता से राजनीति में आए हैं और पूर्व प्रधानमंत्री Chandra Shekhar के मीडिया सलाहकार रह चुके हैं।
वे पहली बार 2018 में उपसभापति बने, 2020 में दोबारा चुने गए और अब 2026 में तीसरी बार इस पद पर पहुंचे हैं। सदन में उनके संयमित संचालन के लिए उन्हें व्यापक सम्मान प्राप्त है।

















