Budget 2026-27 में किफायती आवास को लेकर किसी बड़ी राहत की घोषणा न होने से मिडिल क्लास खरीदारों और बिल्डरों में निराशा देखने को मिल रही है। रियल एस्टेट से जुड़े जानकारों का कहना है कि सस्ते घरों की मांग को दोबारा गति देने के लिए सरकार से जिस तरह के कदमों की उम्मीद थी, वे इस बजट में नजर नहीं आए।
एनारॉक ग्रुप के चेयरमैन अनुज पुरी ने बजट को किफायती आवास के लिहाज से निराशाजनक बताया। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी के बाद से ही इस सेगमेंट की बिक्री लगातार कमजोर होती जा रही है और इस बजट में भी इसे सहारा देने के लिए कोई ठोस उपाय नहीं किया गया। उनके मुताबिक, ब्याज में छूट या किफायती घरों की परिभाषा में बदलाव जैसे कदम इस सेक्टर के लिए बेहद जरूरी थे।
एनारॉक के आंकड़ों के अनुसार, साल 2019 में कुल घरों की बिक्री में किफायती आवास की हिस्सेदारी 38 प्रतिशत से अधिक थी, जो 2022 में घटकर 26 प्रतिशत और 2025 में सिर्फ 18 प्रतिशत रह गई। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर समय रहते इस सेगमेंट को समर्थन नहीं मिला, तो शहरों में ‘सबके लिए घर’ का सपना और दूर होता जाएगा।
नाइट फ्रैंक इंडिया के चेयरमैन शिशिर बैजल ने भी बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि रियल एस्टेट सेक्टर, खासकर किफायती आवास के लिए किसी तरह की वित्तीय राहत न मिलना चिंता की बात है। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि टियर-II और टियर-III शहरों के विकास और बेहतर कनेक्टिविटी पर सरकार का फोकस आने वाले समय में आवास और वेयरहाउसिंग की मांग को बढ़ा सकता है।
वहीं निवेशकों के लिहाज से बजट में कुछ सकारात्मक संकेत भी मिले हैं। वित्त मंत्री द्वारा सरकारी कंपनियों की संपत्तियों के लिए REITs लाने के प्रस्ताव का स्वागत किया गया है। सीबीआरई के चेयरमैन और सीईओ अंशुमन मैगजीन ने कहा कि इससे सरकारी संपत्तियों का बेहतर इस्तेमाल होगा और बड़े निवेशकों का भरोसा इस सेक्टर में और मजबूत होगा।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, रेलवे, बंदरगाह, टेलीकॉम टावर और सरकारी इमारतों जैसी करीब 10 लाख करोड़ रुपये की संपत्तियों को REITs के जरिए बाजार से जोड़ा जा सकता है, जिससे रियल एस्टेट को नई रफ्तार मिल सकती है।




















