कांग्रेस नेता Rahul Gandhi से जुड़े कथित दोहरी नागरिकता मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में अहम घटनाक्रम सामने आया है। न्यायमूर्ति Subhash Vidyarthi ने खुद को इस मामले की सुनवाई से अलग कर लिया है।
न्यायालय ने यह निर्णय याचिकाकर्ता एस. विग्नेश शिशिर द्वारा सोशल मीडिया पर की गई टिप्पणियों को ध्यान में रखते हुए लिया। साथ ही मामले को नई बेंच को सौंपने के लिए फाइल मुख्य न्यायमूर्ति के समक्ष भेजने का निर्देश दिया गया है।
एफआईआर आदेश पर पहले ही लग चुकी है रोक
इससे पहले हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने ओपन कोर्ट में दिए गए उस आदेश पर रोक लगा दी थी, जिसमें राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए गए थे। अदालत ने बाद में अपने आदेश में कहा कि सुनवाई के दौरान यह सवाल उठाया गया था कि क्या राहुल गांधी को नोटिस जारी करना आवश्यक है।
अदालत को बताया गया कि नोटिस जारी करने की जरूरत नहीं है, जिसके बाद एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया गया। हालांकि आदेश टाइप और हस्ताक्षरित होने से पहले ही न्यायालय ने इस पर पुनर्विचार किया।
2014 के फैसले का हवाला
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि वर्ष 2014 में इलाहाबाद हाईकोर्ट की पूर्ण पीठ ने स्पष्ट किया था कि ऐसे मामलों में प्रस्तावित आरोपी को नोटिस देना अनिवार्य है। इस कानूनी स्थिति को देखते हुए बिना नोटिस जारी किए मामला तय करना उचित नहीं माना गया। इसी आधार पर कोर्ट ने अपने पूर्व आदेश पर रोक लगाते हुए मामले की सुनवाई आगे के लिए तय की।
नई बेंच करेगी सुनवाई
अब यह मामला नई बेंच के समक्ष रखा जाएगा, जिसका निर्धारण मुख्य न्यायमूर्ति द्वारा किया जाएगा। अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 20 अप्रैल की तारीख निर्धारित की है।
इस बीच, याचिकाकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों में भारतीय न्याय संहिता, आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम, विदेशी अधिनियम और पासपोर्ट अधिनियम के तहत जांच की मांग की गई है।
कर्नाटक निवासी याचिकाकर्ता एस. विग्नेश शिशिर ने राहुल गांधी पर कथित दोहरी नागरिकता को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। इससे पहले निचली अदालत इस याचिका को खारिज कर चुकी थी। हाईकोर्ट में दायर याचिका में मामले की विस्तृत जांच की मांग की गई है, जिस पर अब नई बेंच सुनवाई करेगी।

















