सुप्रीम कोर्ट ने National Chambal Sanctuary क्षेत्र में हो रहे अवैध रेत खनन और वन रक्षक हरकेश गुर्जर की हत्या पर सख्त नाराजगी जताई है। अदालत ने मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश सरकारों को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि यह गतिविधि पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बन चुकी है।
सर्वोच्च अदालत ने स्पष्ट किया कि अवैध खनन को तुरंत रोका जाए और इसके लिए निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया जाए। कोर्ट ने तीनों राज्यों को 11 मई तक विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।
हत्या मामले में अदालत की कड़ी टिप्पणी
वन रक्षक हरकेश गुर्जर की 8 अप्रैल को कथित तौर पर रेत माफिया द्वारा हत्या किए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने इसे प्रशासनिक विफलता बताया। अदालत ने कहा कि इस तरह की घटनाएं कानून व्यवस्था और निगरानी तंत्र की कमजोरी को दर्शाती हैं।
अदालत ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए और इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने की जरूरत बताई।
हाई-रिजॉल्यूशन CCTV लगाने के निर्देश
जस्टिस Vikram Nath और जस्टिस Sandeep Mehta की पीठ ने 17 अप्रैल की सुनवाई में खनन मार्गों पर हाई-रिजॉल्यूशन सीसीटीवी कैमरे लगाने का आदेश दिया।
अदालत ने कहा कि इन कैमरों की निगरानी जिला स्तर पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और प्रभागीय वन अधिकारी द्वारा की जाए, ताकि अवैध गतिविधियों पर तुरंत कार्रवाई हो सके।
केंद्रीय बल तैनाती की चेतावनी
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि अवैध खनन पर प्रभावी रोक नहीं लगाई गई, तो केंद्र सरकार के सुरक्षा बलों की तैनाती की जा सकती है। साथ ही खनन पर पूर्ण प्रतिबंध जैसे कड़े कदम भी उठाए जा सकते हैं।
अदालत ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देना राज्यों की जिम्मेदारी है और इसमें लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख के बाद मुरैना जिला प्रशासन ने संयुक्त टास्क फोर्स का गठन किया है। इसमें वन, खनिज और राजस्व विभाग शामिल हैं, जो क्षेत्र में अवैध उत्खनन, परिवहन और भंडारण पर नजर रख रहे हैं।
प्रशासन ने रेत उत्खनन पर पूर्ण प्रतिबंध लागू करने की भी जानकारी दी है और निगरानी को और कड़ा किया जा रहा है।

















