पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद राज्य की राजनीति में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी हार स्वीकार करने से इनकार करते हुए चुनाव प्रक्रिया पर ही सवाल उठा दिए हैं। भवानीपुर सीट से हार का सामना करने वाली ममता बनर्जी ने कहा कि यह जनता का जनादेश नहीं बल्कि एक योजनाबद्ध साजिश का परिणाम है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं देंगी। राज्य में भाजपा ने 293 में से 207 सीटों पर जीत दर्ज कर बड़ी राजनीतिक बढ़त हासिल की है, जबकि तृणमूल कांग्रेस 100 सीटों का आंकड़ा भी पार नहीं कर सकी।
ममता बनर्जी ने कोलकाता में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि उनकी पार्टी को सुनियोजित तरीके से नुकसान पहुंचाया गया। उन्होंने दावा किया कि चुनाव के दौरान और मतगणना प्रक्रिया में कई स्तरों पर अनियमितताएं हुईं। बनर्जी ने कहा कि उनके पूरे राजनीतिक जीवन में उन्होंने ऐसा चुनाव कभी नहीं देखा। उन्होंने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग निष्पक्ष संस्था की तरह काम करने के बजाय भाजपा के पक्ष में सक्रिय दिखाई दिया। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि उनकी पार्टी का मनोबल तोड़ने के लिए मतगणना की गति जानबूझकर धीमी रखी गई।
मतगणना प्रक्रिया पर उठे सवाल
तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने आरोप लगाया कि करीब 100 सीटों पर परिणाम प्रभावित किए गए। उन्होंने कहा कि मतगणना के दौरान कई जगहों से शिकायतें मिलीं, लेकिन उन पर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई। ममता बनर्जी ने यह भी दावा किया कि मतगणना केंद्रों के भीतर उनके साथ बदसलूकी हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें धक्का दिया गया और केंद्रीय बलों का व्यवहार निष्पक्ष सुरक्षा एजेंसी जैसा नहीं था। उनके अनुसार चुनावी प्रक्रिया के दौरान लोकतांत्रिक मर्यादाओं का पालन नहीं किया गया।
इन आरोपों के बीच चुनाव आयोग ने सभी दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। पश्चिम Bengal के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि मतगणना पूरी तरह नियमों और कानूनों के अनुसार कराई गई। आयोग ने कहा कि पूरी प्रक्रिया के दौरान सीसीटीवी निगरानी लगातार जारी रही और किसी तरह की तकनीकी या प्रशासनिक गड़बड़ी सामने नहीं आई। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि उम्मीदवार के अनुरोध पर कुछ समय के लिए मतगणना रोकी गई थी, लेकिन बाद में निर्धारित दिशा-निर्देशों के तहत दोबारा शुरू कर दी गई।
चुनाव आयोग ने आरोपों को बताया निराधार
निर्वाचन अधिकारियों ने ममता बनर्जी के धक्का-मुक्की और सीसीटीवी बंद किए जाने के आरोपों को पूरी तरह गलत बताया है। आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया स्वतंत्र, पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से संपन्न हुई। उन्होंने कहा कि कानून सभी उम्मीदवारों पर समान रूप से लागू होता है और किसी को विशेष छूट नहीं दी गई। राजनीतिक हलकों में अब इस पूरे विवाद को लेकर बहस तेज हो गई है। भाजपा ने चुनाव परिणाम को जनता का स्पष्ट जनादेश बताया है, जबकि तृणमूल कांग्रेस लगातार चुनावी प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर रही है।
















