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Wednesday, June 10, 2026
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ममता बनर्जी को कांग्रेस से क्यों निकाला गया? जानिए TMC बनने की पूरी कहानी

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पश्चिम बंगाल की राजनीति में ममता बनर्जी का नाम सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिना जाता है। हालांकि आज वह तृणमूल कांग्रेस (TMC) की प्रमुख हैं, लेकिन उनका राजनीतिक करियर कांग्रेस से शुरू हुआ था। छात्र राजनीति से आगे बढ़ते हुए उन्होंने कांग्रेस के मंच पर अपनी पहचान बनाई और 1984 में पहली बार लोकसभा सांसद बनीं।

समय के साथ ममता बनर्जी और कांग्रेस नेतृत्व के बीच वैचारिक दूरी बढ़ने लगी। पश्चिम बंगाल में वाम मोर्चे के खिलाफ उनके आक्रामक रुख और कांग्रेस की राजनीतिक रणनीति को लेकर मतभेद सामने आने लगे। ममता का मानना था कि राज्य में वामपंथी राजनीति के खिलाफ उनकी लड़ाई को पार्टी नेतृत्व से अपेक्षित समर्थन नहीं मिल रहा था।

कांग्रेस से टकराव और निष्कासन

1990 के दशक में यह मतभेद और गहरा हो गया। ममता बनर्जी लगातार कांग्रेस नेतृत्व पर सवाल उठाने लगीं और पार्टी की नीतियों का खुलकर विरोध करने लगीं। आखिरकार 1997 में कांग्रेस ने उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया। यह फैसला उनकी राजनीतिक यात्रा का बड़ा मोड़ साबित हुआ।

निष्कासन के बाद ममता बनर्जी ने अपने समर्थक नेताओं के साथ अलग राजनीतिक रास्ता चुनने का फैसला किया। इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए उन्होंने 1 जनवरी 1998 को अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (TMC) की स्थापना की। पार्टी का मुख्य लक्ष्य पश्चिम बंगाल में वाम दलों के लंबे राजनीतिक प्रभाव को चुनौती देना था।

TMC का उदय और सत्ता तक का सफर

नई पार्टी बनने के बाद TMC ने तेजी से अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत की। 1999 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने राष्ट्रीय राजनीति में भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। इसके बाद राज्य की राजनीति में उसका प्रभाव लगातार बढ़ता गया।

साल 2011 में TMC ने कांग्रेस के साथ गठबंधन कर पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव लड़ा और वाम मोर्चे के 34 साल पुराने शासन का अंत कर दिया। इस जीत के साथ ममता बनर्जी पहली बार राज्य की मुख्यमंत्री बनीं। इसके बाद भी पार्टी ने लगातार चुनावी सफलता हासिल की और बंगाल की प्रमुख राजनीतिक शक्ति बन गई।

ममता बनर्जी की राजनीतिक यात्रा इस बात का उदाहरण मानी जाती है कि पार्टी के भीतर मतभेद से शुरू हुई एक अलग राह किस तरह एक बड़े क्षेत्रीय राजनीतिक दल और सत्ता तक पहुंच सकती है।

ममता बनर्जी का राजनीतिक सफर

वर्ष / अवधिराजनीतिक सफर की प्रमुख उपलब्धि
1977–1983छात्र जीवन के दौरान ममता बनर्जी ने सक्रिय राजनीति में कदम रखा और पश्चिम बंगाल छात्र परिषद की कार्यसमिति में सदस्य के रूप में जिम्मेदारी निभाई।
1979–1980कांग्रेस (आई) संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए पश्चिम बंगाल इकाई की महासचिव रहीं। इसी दौरान उन्होंने प्रांतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस की सचिव के रूप में भी कार्य किया।
1983–1988श्रमिक और महिला संगठनों में सक्रिय रहते हुए इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस (INTUC) की महिला शाखा की सचिव बनीं। साथ ही दक्षिण कलकत्ता जिला कांग्रेस (आई) में भी संगठनात्मक जिम्मेदारियां संभालीं।
1998कांग्रेस से अलग राह चुनते हुए ममता बनर्जी ने अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (TMC) की स्थापना की और स्वतंत्र राजनीतिक पहचान बनाई।
1999लोकसभा चुनाव में टीएमसी ने एनडीए के साथ गठबंधन कर उल्लेखनीय प्रदर्शन किया। चुनावी सफलता के बाद ममता बनर्जी पहली बार केंद्र सरकार में रेल मंत्री बनीं।
2001तृणमूल कांग्रेस ने एनडीए से दूरी बनाकर कांग्रेस के साथ हाथ मिलाया। विधानसभा चुनाव में पार्टी ने 60 सीटें जीतकर पश्चिम बंगाल की प्रमुख विपक्षी ताकत के रूप में खुद को स्थापित किया।
2011पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस ने ऐतिहासिक जीत दर्ज कर सरकार बनाई। इस विजय के साथ राज्य में लंबे समय से चल रहे वाम शासन का अंत हुआ।
2016 और 2021ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस ने लगातार दो और विधानसभा चुनाव जीते और राज्य की सत्ता पर अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखी।

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