इंदौर के सरवटे बस स्टैंड से ऐसी घटना सामने आई जिसने इंसानियत को आईना दिखा दिया। एक दंपती बस में नवजात लेकर चढ़ा और “सामान लाने” का बहाना बनाकर उतर गया — फिर कभी लौटे ही नहीं। जब सीट के पास कंबल में लिपटी मासूम दिखी, तो बस में सन्नाटा फैल गया। अच्छा हुआ कि बस के कंडक्टर की संवेदना अब भी ज़िंदा थी, वरना वो मासूम भी किसी कोने में रोते-रोते थक जाती।
इस बार फरिश्ता वर्दी में नहीं, इंसानियत में मिला। घटना मंगलवार दोपहर की है। सरवटे बस स्टैंड से सनावद जाने वाली बस में एक दंपती नवजात बच्ची के साथ चढ़ा। कुछ देर बाद उन्होंने कहा कि “सामान लाने जा रहे हैं” और उतर गए। जब काफी देर तक वापस नहीं लौटे, तो कंडक्टर को शक हुआ। उसने सीट के पास देखा तो कंबल में लिपटी एक नवजात बच्ची मिली। तत्काल सूचना दी गई, छोटी ग्वालटोली थाने की टीम पहुंची और महिला पुलिसकर्मी ने बच्ची को गोद में लेकर अस्पताल पहुंचाया।
बच्ची स्वस्थ है। सीसीटीवी से पता चला कि दंपती कौन थे — मगर सवाल अब ये नहीं कि वो कौन हैं, बल्कि ये है कि किसी मां का दिल इतना पत्थर कैसे हो सकता है?
कहते हैं, भगवान हर जगह नहीं हो सकता, इसलिए उसने मां बनाई — पर कभी-कभी वही मां खुद भगवान की बनाई कसम तोड़ देती है। जिसने जन्म दिया वो छोड़ गया, जिसने देखा उसने अपना लिया — यही फर्क है खून के रिश्ते और इंसानियत के फर्ज में। शायद ऐसे वाकये याद दिलाने के लिए ही ऊपर वाला अब भी इंसानों की भीड़ में कुछ “दिलवाले” भेजता है, वरना बाकी तो बस भीड़ ही रह गई है… नाम की, काम की नहीं।





















