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Friday, April 17, 2026
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Indore Water Crisis: 158 पन्नों की रिपोर्ट, 7 मौतें… लेकिन बीमारी का नाम तक नहीं

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Indore Water Crisis: मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ में गुरुवार को राज्य सरकार की ओर से भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल से फैले उल्टी-दस्त प्रकोप को लेकर स्थिति रिपोर्ट पेश की गई। इस रिपोर्ट में यह स्वीकार किया गया है कि 28 दिसंबर से 12 जनवरी के बीच शहर के भागीरथपुरा इलाके में एक पांच माह के बालक समेत कुल सात लोगों की मौत हुई है। हालांकि हैरानी की बात यह रही कि 158 पन्नों की इस विस्तृत रिपोर्ट में किसी भी मृतक की मौत का स्पष्ट कारण दर्ज नहीं किया गया है।

यह मामला मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ में न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की खंडपीठ के समक्ष विचाराधीन है, जहां भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से लोगों की मौत को लेकर दायर विभिन्न जनहित याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई हो रही है। अदालत में पेश की गई रिपोर्ट एसडीओ द्वारा दाखिल की गई, जिसमें बताया गया कि इस अवधि में उर्मिला (60), तारा (65), नंदलाल (70), हीरालाल (65), पांच माह का बालक अव्यान, अरविंद निखार (43) और भगवान भामे (73) की मौत हुई।

रिपोर्ट के अनुसार उर्मिला, तारा, नंदलाल और भगवान भामे की इलाज के दौरान मृत्यु हुई, जबकि हीरालाल को शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में मृत अवस्था में लाया गया था। पांच माह के बालक अव्यान और अरविंद निखार की मौत का कारण रिपोर्ट में ‘अज्ञात’ बताया गया है। इसके साथ ही मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) द्वारा प्रस्तुत विवरण में भी सभी सात मृतकों के सामने ‘मौत का कारण’ वाले कॉलम को खाली छोड़ा गया है।

सुनवाई के दौरान एक याचिकाकर्ता के अधिवक्ता विभोर खंडेलवाल ने पीटीआई-भाषा को बताया कि अदालत में राज्य सरकार के एक वकील ने मौखिक रूप से स्वीकार किया कि भागीरथपुरा में लगभग 23 लोगों की मौत हुई है और इनमें से 15 लोगों की मौत दूषित पानी पीने से हुई मानी जा रही है। इसी मामले में छह जनवरी को दिए गए निर्देशों के अनुपालन में राज्य के मुख्य सचिव अनुराग जैन ऑनलाइन माध्यम से अदालत के समक्ष उपस्थित हुए।

मुख्य सचिव ने अदालत को बताया कि निर्देशों के अनुसार भागीरथपुरा के निवासियों को टैंकरों के जरिए स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि दूषित जल स्रोतों की पहचान कर उन्हें बंद कर दिया गया है, जिनमें कुल 51 नलकूप शामिल हैं। इन जल स्रोतों का क्लोरीनीकरण और अन्य शुद्धिकरण प्रक्रियाओं से उपचार किया जा रहा है।

अनुराग जैन ने यह भी जानकारी दी कि घर-घर सर्वेक्षण कर अब तक करीब 1.62 लाख लोगों के स्वास्थ्य की जांच की जा चुकी है। उल्टी-दस्त प्रकोप के बाद कुल 440 मरीजों को अस्पतालों में भर्ती कराया गया था, जिनमें से 411 को इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई है, जबकि 29 मरीज अब भी अस्पतालों में भर्ती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी मरीजों का इलाज पूरी तरह सरकारी खर्च पर किया जा रहा है।

मुख्य सचिव ने अदालत को बताया कि क्षेत्र में अलग-अलग स्थानों पर पेयजल की गुणवत्ता की जांच की जा रही है और जलापूर्ति सुधारने के लिए नई पाइपलाइन बिछाने के ठेके भी दिए जा चुके हैं। राज्य सरकार और इंदौर नगर निगम ने इस पूरे मामले में अपनी-अपनी रिपोर्ट अदालत में पेश की है।

उच्च न्यायालय ने निर्देश दिए कि सभी याचिकाकर्ताओं के वकीलों को राज्य सरकार की ओर से दाखिल की गई रिपोर्ट की प्रतियां उपलब्ध कराई जाएं और वे 19 जनवरी तक इन पर अपना जवाब दाखिल करें। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 20 जनवरी की तारीख तय की है और मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि वह उस दिन भी ऑनलाइन माध्यम से पेश हों।

इस बीच, स्थानीय नागरिकों का दावा है कि भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से फैले उल्टी-दस्त प्रकोप में अब तक 23 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं इंदौर के शासकीय महात्मा गांधी स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय की एक समिति द्वारा तैयार ‘डेथ ऑडिट’ रिपोर्ट में संकेत दिया गया है कि कम से कम 15 मौतें इस प्रकोप से किसी न किसी रूप में जुड़ी हो सकती हैं।

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