अयोध्या के राम मंदिर में दान और चढ़ावे से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। मामले में जहां जांच एजेंसियां अपनी कार्रवाई कर रही हैं, वहीं विपक्षी दल भी लगातार सवाल उठा रहे हैं। इसी क्रम में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने एक बयान देकर नई चर्चा छेड़ दी है।
भोपाल में मीडिया से बातचीत के दौरान दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर ट्रस्ट और उससे जुड़े मामलों पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त के नाम का भी उल्लेख किया, जिसके बाद राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है।
दान राशि को लेकर जताई चिंता
पत्रकारों से बातचीत में दिग्विजय सिंह ने कहा कि देशभर के करोड़ों लोगों ने श्रद्धा और विश्वास के साथ राम मंदिर निर्माण के लिए योगदान दिया था। ऐसे में यदि दान राशि के उपयोग को लेकर किसी प्रकार के सवाल उठ रहे हैं, तो उनकी निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि इस मामले में सामने आ रही खबरों ने कई लोगों को आश्चर्य में डाल दिया है और सच्चाई सामने आनी चाहिए।
मुख्य चुनाव आयुक्त का लिया नाम
अपने बयान में दिग्विजय सिंह ने यह भी कहा कि राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े कुछ नामों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का जिक्र करते हुए कहा कि उनका नाम ट्रस्ट से जुड़े संदर्भ में सामने आना कई लोगों के लिए चर्चा का विषय बना हुआ है।
उधर, राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े वित्तीय मामलों की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (SIT) लगातार जांच प्रक्रिया में जुटा हुआ है। सूत्रों के अनुसार जांच टीम ने ट्रस्ट के पदाधिकारियों और प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभालने वाले अधिकारियों से पूछताछ की है।
जांच के दौरान दान राशि के संग्रह, रिकॉर्ड प्रबंधन और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं से संबंधित जानकारी जुटाई जा रही है।
बताया जा रहा है कि जांच अधिकारियों ने ट्रस्ट के प्रमुख पदाधिकारियों से कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर बातचीत की। इसके अलावा दान राशि की गिनती और लेखा-जोखा से जुड़े कर्मचारियों से भी जानकारी ली गई है।
जांच एजेंसियों का उद्देश्य यह पता लगाना है कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और क्या किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता हुई है या नहीं।
कैसे शुरू हुआ विवाद?
राम मंदिर दान राशि को लेकर विवाद उस समय चर्चा में आया जब कुछ राजनीतिक नेताओं ने सार्वजनिक रूप से चढ़ावे और दान के उपयोग को लेकर सवाल उठाए। इसके बाद मामले ने राजनीतिक रंग पकड़ लिया और निष्पक्ष जांच की मांग होने लगी।
इसी के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने ट्रस्ट की ओर से मिले अनुरोध के आधार पर विशेष जांच दल का गठन किया था ताकि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जा सके।

















