मध्य प्रदेश एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) ने भोपाल से एक कोचिंग संचालक को गिरफ्तार कर एक बड़े नेटवर्क का खुलासा करने का दावा किया है। एजेंसी के अनुसार आरोपी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए युवाओं तक पहुंच बनाकर उन्हें कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित करने की कोशिश कर रहा था।
गिरफ्तार आरोपी की पहचान भोपाल के काजी कैंप क्षेत्र निवासी मोहम्मद फराज के रूप में हुई है। ATS फिलहाल उससे पूछताछ कर रही है और मामले से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
सोशल मीडिया के जरिए बनाता था संपर्क
जांच एजेंसी के मुताबिक आरोपी व्हाट्सऐप, टेलीग्राम और अन्य ऑनलाइन माध्यमों के जरिए युवाओं से जुड़ा हुआ था। पूछताछ में सामने आया है कि वह देश और विदेश के कई लोगों के संपर्क में था। एजेंसी का दावा है कि इन प्लेटफॉर्म्स के जरिए कथित रूप से युवाओं को उग्र विचारधारा की ओर आकर्षित करने का प्रयास किया जा रहा था।
ATS के अनुसार पूछताछ के दौरान नईम नामक व्यक्ति का नाम सामने आया है, जिस पर आरोपी को प्रभावित करने का आरोप है। एजेंसी का दावा है कि इसी व्यक्ति ने फराज को कुछ ऐसे लोगों की कहानियां और विचार बताए, जिनसे प्रभावित होकर वह कथित तौर पर इस नेटवर्क के संपर्क में आया।
जांच एजेंसियों का कहना है कि आरोपी ने पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। ATS का दावा है कि नेटवर्क से जुड़े लोगों को विदेश में प्रशिक्षण लेने और इसके लिए आवश्यक दस्तावेज तैयार करने की सलाह दी जाती थी। साथ ही कुछ मामलों में भय का माहौल बनाने और विशेष व्यक्तियों को निशाना बनाने जैसी बातों का भी उल्लेख सामने आया है।
पड़ोसियों के मुताबिक मोहम्मद फराज इलाके में सामान्य जीवन जीता था। वह बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने के साथ-साथ धार्मिक शिक्षा से जुड़ी कक्षाएं भी संचालित करता था। इसके अलावा वह एक निजी क्लीनिक में कंपाउंडर के रूप में काम करता था। गिरफ्तारी के बाद इलाके में चर्चा का माहौल है और लोग इस मामले को लेकर हैरानी जता रहे हैं।
ATS को मिले अहम दस्तावेज
जांच एजेंसी का दावा है कि आरोपी के पास से कुछ ऐसे दस्तावेज बरामद हुए हैं, जिनकी जांच की जा रही है। इनमें कथित तौर पर कुछ संगठनों से जुड़े साहित्य और दस्तावेज शामिल हैं। एजेंसी इनकी सत्यता और उद्देश्य का पता लगाने में जुटी है।
फराज से पूछताछ के बाद ATS ने उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले से नईम कुरैशी नामक व्यक्ति को भी गिरफ्तार किया है। एजेंसी का आरोप है कि वह इस पूरे नेटवर्क के संचालन में अहम भूमिका निभा रहा था।
जांच के दौरान जब्त किए गए मोबाइल फोन और डिजिटल डिवाइसों की फॉरेंसिक जांच की जा रही है। ATS का दावा है कि कुछ विदेशी नंबरों और ऑनलाइन अकाउंट्स से संपर्क के संकेत मिले हैं। एजेंसी यह भी जांच कर रही है कि कहीं संवेदनशील सूचनाएं या अन्य सामग्री विदेशों में साझा तो नहीं की गई थी।
मुख्यमंत्री ने दिए सख्त निर्देश
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री ने भी अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की है। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि राज्य में किसी भी प्रकार की कट्टरपंथी या राष्ट्रविरोधी गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
फिलहाल ATS नेटवर्क के अन्य संभावित सदस्यों और उसके विस्तार की जांच में जुटी हुई है। अधिकारियों का मानना है कि आने वाले दिनों में पूछताछ और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर कई और महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं।















