लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़ा 131वां संविधान संशोधन विधेयक पारित नहीं हो सका। दो दिनों तक चली चर्चा के बाद शुक्रवार शाम हुई वोटिंग में यह बिल आवश्यक बहुमत हासिल नहीं कर पाया।
मतदान में कुल 528 सांसदों ने हिस्सा लिया, जिनमें 298 ने बिल के पक्ष में और 230 ने विरोध में वोट डाला। हालांकि समर्थन में साधारण बहुमत था, लेकिन संविधान संशोधन के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत नहीं मिल सका।
दो-तिहाई बहुमत की कमी बनी वजह
संविधान संशोधन विधेयक पारित कराने के लिए सदन में मौजूद और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई समर्थन की आवश्यकता होती है। इस हिसाब से बिल को पास कराने के लिए 352 वोट चाहिए थे।
सत्तारूढ़ National Democratic Alliance के पास अपने स्तर पर पर्याप्त संख्या नहीं थी। कुछ अतिरिक्त वोट मिलने के बावजूद आवश्यक आंकड़ा नहीं जुट सका।
महिला आरक्षण पर ‘महाब्रेक’
यह विधेयक लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने से जुड़ा था। प्रस्तावित था कि यह व्यवस्था भविष्य के चुनावों में लागू की जाएगी। बिल के गिरने के साथ ही महिला आरक्षण लागू करने की प्रक्रिया को बड़ा झटका लगा है।
संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju ने कहा कि जब संविधान संशोधन विधेयक ही पारित नहीं हुआ, तो उससे जुड़े अन्य विधेयक आगे नहीं बढ़ाए जा सकते।
इसमें ‘परिसीमन विधेयक, 2026’ और ‘संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026’ भी शामिल हैं, जिन्हें अब रोक दिया गया है।
विपक्ष और सरकार आमने-सामने
विपक्ष ने इस विधेयक का विरोध किया था, खासकर परिसीमन के मुद्दे को लेकर। नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi ने कहा कि यह विधेयक महिला आरक्षण से ज्यादा चुनावी ढांचे को बदलने का प्रयास था।
उन्होंने सुझाव दिया कि यदि सरकार महिला आरक्षण लागू करना चाहती है तो पहले से पारित पुराने प्रावधानों को लागू किया जाए।
















