संसद में महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक गुरुवार को पेश किया जाएगा। इस विधेयक के साथ ही 16 से 18 अप्रैल के बीच चलने वाला सत्र राजनीतिक रूप से काफी अहम माना जा रहा है, जहां सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस की संभावना है।
विधेयक के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने का प्रस्ताव है। इसके साथ ही परिसीमन से जुड़ी प्रक्रिया को भी इसमें शामिल किया गया है, जो विवाद का मुख्य कारण बन रही है।
विपक्ष का समर्थन लेकिन शर्तों के साथ
विपक्षी दलों ने स्पष्ट किया है कि वे महिला आरक्षण के सिद्धांत के खिलाफ नहीं हैं। हालांकि, उनका विरोध परिसीमन प्रक्रिया को लेकर है, जिसे वे राजनीतिक संतुलन पर असर डालने वाला मानते हैं। इसी वजह से संसद में इस विधेयक पर सहमति बनाना सरकार के लिए आसान नहीं माना जा रहा है।
NDA के सामने संख्या बल की चुनौती
संविधान संशोधन विधेयक पारित कराने के लिए दोनों सदनों में मौजूद और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई समर्थन की आवश्यकता होती है। मौजूदा स्थिति में National Democratic Alliance के पास लोकसभा में यह संख्या पूरी नहीं है।
ऐसे में सरकार को विधेयक पारित कराने के लिए विपक्षी दलों के समर्थन की जरूरत पड़ेगी, जिससे राजनीतिक समीकरण और अहम हो गए हैं।
प्रस्तावित विधेयक में लोकसभा की कुल सीटों को 543 से बढ़ाकर 850 करने का सुझाव दिया गया है। इसके लिए सरकार परिसीमन आयोग के गठन से जुड़ा अलग विधेयक भी ला सकती है।
इसके अलावा केंद्र शासित प्रदेशों से संबंधित कानूनों में संशोधन की भी तैयारी की जा रही है, ताकि नई व्यवस्था लागू की जा सके।

















