Tata Consultancy Services के नासिक कार्यालय से जुड़े मामले में जांच जारी है। इस बीच एक और महिला कर्मचारी सामने आई हैं, जिन्होंने कार्यस्थल पर युवतियों को निशाना बनाने के एक पैटर्न का आरोप लगाया है।
महिला ने एक टीवी चैनल से बातचीत में बताया कि नासिक ट्रांसफर के बाद उन्हें मुख्य बिल्डिंग से अलग स्थान पर काम करने के लिए कहा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें छत पर अकेले बैठकर काम करने के लिए मजबूर किया गया और कई बार उनका फोन व निजी सामान भी जब्त कर लिया जाता था।
अलग-थलग रखने और नियंत्रण के आरोप
महिला कर्मचारी के अनुसार, जब भी वह वॉशरूम या अन्य काम से नीचे आती थीं, तो सुरक्षा या अन्य कारणों का हवाला देकर उनका मोबाइल फोन और बैग ले लिया जाता था। उन्होंने दावा किया कि यह व्यवहार नियमित रूप से होता था।
उन्होंने यह भी कहा कि कंपनी में कई युवा कर्मचारियों के साथ इसी तरह का व्यवहार किया जा रहा था, जिससे यह एक संगठित तरीके से किए जा रहे शोषण का संकेत देता है।
युवतियों को ‘सॉफ्ट टारगेट’ बनाने का आरोप
महिला के मुताबिक, 20 से 25 वर्ष आयु वर्ग की महिलाओं को खास तौर पर निशाना बनाया जाता था। उनका कहना था कि शिकायत की स्थिति में एचआर विभाग से भी अपेक्षित सहयोग नहीं मिलता था।
उन्होंने आरोप लगाया कि एचआर विभाग भी दबाव में था और कई मामलों में शिकायत दर्ज कराने से हतोत्साहित किया जाता था।
पुलिस की जांच और SIT गठन
नासिक पुलिस के अनुसार, जांच में सामने आया है कि आरोपी एक संगठित समूह की तरह काम कर रहे थे। Sandeep Karnik ने बताया कि दो महिला आरोपियों की भूमिका भी सामने आई है, जिनमें से एक फरार है।
पुलिस ने अब तक धर्मांतरण के प्रयास और यौन उत्पीड़न से जुड़े 9 मामले दर्ज किए हैं। इस सप्ताह की शुरुआत में आठ महिला कर्मचारियों की शिकायतों की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है।
पुलिस ने इस मामले में आठ कर्मचारियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें सात पुरुष और एक महिला ऑपरेशन मैनेजर शामिल हैं। एक अन्य महिला आरोपी अभी फरार बताई गई है।
जांच एजेंसियों के अनुसार, मामले की सभी पहलुओं से जांच जारी है और पीड़ितों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं।

















