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Wednesday, April 8, 2026
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मध्य प्रदेश में UCC लागू करने की तैयारी तेज, साल के अंत तक कानून लाने की योजना

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राज्य सरकार के मंत्री विश्वास सारंग ने इस पहल का समर्थन करते हुए इसे समानता और भविष्य के लिए जरूरी बताया है। उनका कहना है कि यह कानून सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू होना चाहिए।

उत्तराखंड और गुजरात के बाद अब मध्य प्रदेश में भी समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में सरकार ने कदम तेज कर दिए हैं। राज्य सरकार का लक्ष्य इस वर्ष के अंत तक इस कानून को लागू करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना है।

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कैबिनेट बैठक के दौरान गृह विभाग को UCC का मसौदा तैयार करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही मंत्रियों और अधिकारियों से इस विषय पर सुझाव देने और सक्रिय रूप से काम करने को कहा गया है।

मसौदा तैयार करने की प्रक्रिया शुरू

सरकारी अधिकारियों के अनुसार, गृह विभाग को कानून का प्रारूप तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है। इसके साथ ही मंत्रियों को निर्देश दिया गया है कि वे उत्तराखंड और गुजरात में UCC लागू करते समय आई चुनौतियों का अध्ययन करें।

संभावना जताई जा रही है कि विधेयक का मसौदा तैयार करने के लिए एक समिति का गठन किया जाएगा। इससे पहले अन्य राज्यों में भी इसी तरह विशेषज्ञों की समिति बनाकर मसौदा तैयार किया गया था।

आदिवासियों को दायरे से बाहर रखने की चर्चा

सरकार के एक मंत्री के अनुसार, उत्तराखंड और गुजरात की तरह मध्य प्रदेश में भी आदिवासी समुदाय को UCC के दायरे से बाहर रखा जा सकता है। यह मुद्दा राज्य में नीति निर्माण के दौरान महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

मध्य प्रदेश में UCC को लेकर चर्चा पहली बार 2022 में शुरू हुई थी, जब तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इसकी संभावनाओं पर विचार के लिए समिति बनाने की घोषणा की थी, हालांकि उस समय यह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।

राष्ट्रीय स्तर पर भी उठ रहा मुद्दा

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में एक जनसभा के दौरान पूरे देश में UCC लागू करने की बात दोहराई थी। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि आदिवासी समुदाय को इसके दायरे से बाहर रखा जा सकता है।

गौरतलब है कि फरवरी 2024 में उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना था जिसने UCC कानून पारित किया, जबकि गुजरात ने भी हाल ही में इसी दिशा में कदम बढ़ाया है।

विपक्ष और सत्ता पक्ष में मतभेद

राज्य सरकार के मंत्री विश्वास सारंग ने इस पहल का समर्थन करते हुए इसे समानता और भविष्य के लिए जरूरी बताया है। उनका कहना है कि यह कानून सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू होना चाहिए।

वहीं कांग्रेस के प्रवक्ता के.के. मिश्रा ने इस कदम की आलोचना करते हुए इसे मूल मुद्दों से ध्यान भटकाने का प्रयास बताया है। उन्होंने कहा कि राज्य में बेरोजगारी और किसानों के मुद्दे ज्यादा महत्वपूर्ण हैं।

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