IAS Santosh Verma की पदोन्नति के लिए बनाए गए फर्जी कोर्ट फैसले की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। एसआईटी को जांच में निलंबित जज विजेंद्र रावत के कोर्ट कंप्यूटर से ही फर्जी फैसले की डिजिटल कॉपी मिली है। इसके अलावा कोर्ट के टाइपिस्ट के घर से जब्त पेनड्राइव में भी यही फर्जी दस्तावेज पाया गया। जांच से पता चला है कि यह फैसला सुबह 4 से 7 बजे के बीच टाइप किया गया था।
जज के कंप्यूटर से मिली फर्जी फैसले की कॉपी
एसआईटी की जांच में सबसे बड़ा सबूत तब मिला जब उन्होंने निलंबित स्पेशल जज विजेंद्र रावत के कोर्ट के कंप्यटर से फर्जी फैसले की एक डिजिटल कॉपी बरामद की। इससे यह साफ हो गया कि यह दस्तावेज कोर्ट के अंदर ही तैयार किया गया था। जांचकर्ता अब 300 से ज्यादा केस फाइलों और हर दस्तावेज का फॉरेंसिक जांच से विश्लेषण कर रहे हैं। खासतौर पर जज के हस्ताक्षरों की जांच की जा रही है कि क्या फर्जी फैसले पर जानबूझकर अलग तरह से दस्तखत किए गए थे।
टाइपिस्ट के पेनड्राइव में मिला फर्जी दस्तावेज
इसके बाद एसआईटी ने कोर्ट में काम कर चुके टाइपिस्ट नीतू सिंह चौहान के घर पर छापा मारा। इस छापेमारी में पुलिस को उनके घर से एक पेनड्राइव मिली। हैरानी की बात यह थी कि उसी पेनड्राइव में भी वही फर्जी फैसला सेव मिला, जिसे आईएएस संतोष वर्मा के पक्ष में इस्तेमाल किया गया था।
सुबह 4 से 7 बजे के बीच हुआ था टाइप
जांच में यह भी पता चला है कि यह फर्जी फैसला सुबह 4 बजे से 7 बजे के बीच लिखा गया था। जांच अधिकारियों का मानना है कि जज ने इस पर अपने नियमित दस्तखतों से अलग हस्ताक्षर किए और फिर इसे आवक-जावक शाखा में भिजवा दिया गया ताकि संतोष वर्मा को सत्यापित प्रति मिल सके और उनकी पदोन्नति का रास्ता साफ हो जाए।
तीनों आरोपियों को मिल चुकी है जमानत
इस हाई-प्रोफाइल मामले में तीनों मुख्य आरोपी – निलंबित जज विजेंद्र रावत, आईएएस संतोष वर्मा और टाइपिस्ट नीतू सिंह चौहान को अदालत से जमानत मिल चुकी है। टाइपिस्ट नीतू सिंह पुलिस रिमांड पर थीं, लेकिन शुक्रवार को ही उन्हें भी जमानत दे दी गई।
अब आगे क्या होगा?
एसआईटी अब बरामद हुए सभी सबूतों, फाइलों, डिजिटल डेटा, पेनड्राइव और हस्ताक्षर रिपोर्ट के आधार पर अपनी आगे की तैयारी कर रही है। जांच से यह भी पता चल सकता है कि इस फर्जी फैसले के पीछे कौन-कौन जिम्मेदार है। हो सकता है कि इस मामले में कुछ बड़े नाम भी सामने आए।

















