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Monday, March 2, 2026
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भारतीय न्यूक्लियर प्लांट और तेल सप्लाई पर रूस की गारंटी, अमेरिका की टेंशन बढ़ी!

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दो दिवसीय भारत दौरे पर पहुंचे रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को संयुक्त बयान जारी किया। इस दौरान पुतिन ने साफ कहा कि भारत को मिल रही तेल सप्लाई बिना रुकावट जारी रहेगी। पुतिन का यह बयान अमेरिका को चुभ सकता है क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत पर लगातार दबाव बनाते रहे हैं कि वह रूसी तेल खरीदना बंद करे। ट्रंप ने इसी मुद्दे को लेकर भारत पर 50 फीसदी तक का टैरिफ लगा दिया है।

नई दिल्ली में पीएम मोदी से मुलाकात के दौरान पुतिन ने कहा कि रूस भारत का भरोसेमंद सप्लायर है। उन्होंने बताया कि तेल, गैस, कोयला और एनर्जी सेक्टर की हर जरूरत के लिए रूस भारत के साथ खड़ा है। पुतिन ने कहा कि भारतीय इकॉनमी तेज रफ्तार से आगे बढ़ रही है और ऐसे में रूस उसकी एनर्जी जरूरतों को पूरा करने के लिए तैयार है। उन्होंने यह भी बताया कि दोनों देश एनर्जी सेक्टर में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा कर रहे हैं।

रूसी राष्ट्रपति ने ब्रिक्स और एससीओ जैसे मंचों का जिक्र करते हुए कहा कि भारत और रूस दुनिया के कई देशों के साथ मिलकर स्वतंत्र और आत्मनिर्भर विदेश नीति पर काम कर रहे हैं। पुतिन ने कहा कि दोनों देश संयुक्त राष्ट्र के कानूनों और सिद्धांतों की रक्षा में भी एकजुट हैं। उन्होंने बताया कि रूस अपने भारतीय साझेदारों के साथ नए इंटरनेशनल ट्रांसपोर्ट नेटवर्क बनाने पर भी काम कर रहा है जिसमें रूस या बेलारूस से हिंद महासागर तक नॉर्थ साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर शामिल है।

द्विपक्षीय व्यापार 100 बिलियन पहुंचने की उम्मीद

न्यूक्लियर सहयोग पर भी पुतिन ने बड़ी जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि रूस भारत के सबसे बड़े न्यूक्लियर प्लांट के प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है। छह में से तीन रिएक्टर पहले ही एनर्जी नेटवर्क से जुड़ चुके हैं। पुतिन ने बताया कि पिछले साल दोनों देशों के बीच व्यापार 12 फीसदी बढ़ा जो लगभग 64 बिलियन डॉलर के स्तर पर पहुंच गया। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में यह आंकड़ा 100 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है।

पुतिन ने कहा कि भारत ने चुनौतियों की एक सूची दी है जिन पर रूस काम करेगा। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच कमर्शियल लिंक बढ़ाने में भारत और यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन के बीच प्रस्तावित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट बड़ी भूमिका निभाएगा। इस एफटीए पर काम पहले से ही आगे बढ़ रहा है और इसकी मंजूरी से दोनों देशों के व्यापार को नई दिशा मिलेगी।

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