West Bengal के मुर्शिदाबाद जिले में तृणमूल कांग्रेस के विधायक हुमायूं कबीर के बयान ने राजनीतिक माहौल को अचानक गर्म कर दिया है। कबीर ने ऐलान किया कि वे 6 दिसंबर को ‘बाबरी मस्जिद’ नाम से एक बड़े धार्मिक ढांचे की नींव रखेंगे। यह वही तारीख है जब 1992 में अयोध्या की 16वीं सदी की बाबरी मस्जिद ढहाई गई थी।
कबीर ने एएनआई से बातचीत में कहा कि लगभग 464 साल पहले बाबर के मिलिट्री कमांडर ने मस्जिद बनाई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि जब राम मंदिर बनाने के लिए मस्जिद तोड़ी गई और किसी ने विरोध नहीं किया, तो उनके मस्जिद बनाने के फैसले पर आपत्ति क्यों हो रही है। उन्होंने कहा कि अगर सुप्रीम कोर्ट या गृह मंत्रालय ने इस पर रोक लगाई है तो वे फैसला बदल देंगे।
कबीर ने यहां तक कहा कि अगर लोग उन्हें धमकाना चाहते हैं या सिर काटने की बात करते हैं तो वे 6 दिसंबर को समारोह के दौरान तैयार रहेंगे। उन्होंने कहा कि यह उनकी व्यक्तिगत प्रतिज्ञा है और वह इसे राजनीतिक एजेंडा नहीं मानते।
टीएमसी ने बयान से झाड़ा पल्ला
कबीर के इस बयान ने जहां मुस्लिम बहुल मुर्शिदाबाद में बहस छेड़ दी है, वहीं टीएमसी नेतृत्व ने खुद को इस घोषणा से दूर कर लिया। टीएमसी के चीफ निर्मल घोष ने कहा कि पार्टी का कबीर के इस कदम से कोई संबंध नहीं है।
उधर BJP ने इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी। नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया कि हुमायूं कबीर जानबूझकर जिले में शांति भंग करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह वही इलाका है जहां वक्फ (अमेंडमेंट) एक्ट के खिलाफ विरोध के दौरान सांप्रदायिक झड़पें हो चुकी हैं। अधिकारी ने केंद्रीय एजेंसियों से यह भी जांच करने को कहा कि क्या कबीर हाल ही में बांग्लादेश गए थे?
शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि कोई भी समुदाय पूजा स्थल बना सकता है, लेकिन यह घोषणा कि 6 दिसंबर को बाबरी मस्जिद बनेगी, संविधान और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों की अवहेलना है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कदम जानबूझकर माहौल भड़काने और सद्भाव तोड़ने के उद्देश्य से उठाया गया है।

















