35.1 C
Indore
Wednesday, June 3, 2026
Homeअन्य राज्यTMC Crisis: 50 से ज्यादा विधायकों के समर्थन के दावे से बढ़ी...

TMC Crisis: 50 से ज्यादा विधायकों के समर्थन के दावे से बढ़ी ममता बनर्जी की मुश्किलें, विधानसभा पहुंचे बागी विधायक

Date:

पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के भीतर उभरे असंतोष ने नया मोड़ ले लिया है। पार्टी से निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा के विधानसभा पहुंचने तथा 50 से अधिक विधायकों के समर्थन का दावा किए जाने के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है।

TMC Crisis: पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर चल रहा विवाद अब खुलकर सामने आता दिखाई दे रहा है। पार्टी से हाल ही में निष्कासित किए गए विधायक ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा के विधानसभा पहुंचने के बाद राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। दोनों नेताओं के समर्थकों की ओर से दावा किया जा रहा है कि उन्हें 50 से अधिक विधायकों का समर्थन प्राप्त है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, बागी खेमे में ऋतब्रत बनर्जी को विधानसभा में विपक्ष का नया नेता बनाने को लेकर भी चर्चा चल रही है। हालांकि इन दावों को लेकर अभी तक विधानसभा अध्यक्ष या किसी संवैधानिक प्राधिकरण की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

फर्जी हस्ताक्षर विवाद से बढ़ा तनाव

विवाद की शुरुआत उस समय तेज हुई जब ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने आरोप लगाया कि 6 मई को विपक्ष के नेता, उपनेता और चीफ व्हिप के चयन से जुड़े प्रस्ताव पत्र में कई विधायकों के हस्ताक्षर कथित रूप से फर्जी तरीके से किए गए थे। दोनों नेताओं का दावा था कि उनके हस्ताक्षर भी बिना अनुमति के इस्तेमाल किए गए। इस विवाद को लेकर उन्होंने विधानसभा सचिवालय में शिकायत भी दर्ज कराई थी।

इसके बाद टीएमसी नेतृत्व ने दोनों विधायकों को पार्टी विरोधी गतिविधियों का आरोप लगाते हुए निष्कासित कर दिया। पार्टी ने कहा कि उनका आचरण संगठन के हितों के खिलाफ था।

क्या बन सकता है नया गुट?

हाल के दिनों में बागी नेताओं की कई विधायकों से मुलाकात की खबरें सामने आई हैं। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि 50 से अधिक विधायक एक अलग समूह के समर्थन में हैं और विधानसभा में अपनी ताकत दिखाने की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि किसी दल के दो-तिहाई विधायक अलग गुट बनाते हैं तो दल-बदल कानून के तहत उनकी सदस्यता सुरक्षित रह सकती है। इसी वजह से मौजूदा घटनाक्रम की तुलना महाराष्ट्र में शिवसेना के विभाजन से की जा रही है।

ममता बनर्जी के लिए क्यों अहम है यह संकट?

टीएमसी के भीतर बढ़ती असहमति ऐसे समय सामने आई है जब पार्टी पहले से ही चुनावी झटकों और संगठनात्मक चुनौतियों का सामना कर रही है। बागी नेताओं का दावा है कि वे पार्टी की मूल विचारधारा को बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं, जबकि टीएमसी नेतृत्व इसे अनुशासनहीनता बता रही है।

Related Posts

spot_img

मध्य प्रदेश