Plastic Currency Update: भारत में जल्द ही प्लास्टिक के नोट चलन में आने की दिशा में अहम पहल शुरू हो गई है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से जुड़ी संस्था भारतीय रिजर्व बैंक नोट मुद्रा प्राइवेट लिमिटेड (BRBNMPL) ने पॉलीमर सब्सट्रेट (Polymer Substrate) के घरेलू उत्पादन को लेकर रुचि अभिव्यक्ति (EOI) जारी की है। माना जा रहा है कि इस पहल के सफल होने के बाद भविष्य में 10 रुपये और 20 रुपये के पॉलीमर नोट सबसे पहले जारी किए जा सकते हैं।
फिलहाल देश में प्रचलित सभी नोट विशेष कागज पर छापे जाते हैं, लेकिन इनके जल्दी फटने, गंदे होने और खराब होने की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। इन्हीं चुनौतियों को देखते हुए अब पॉलीमर आधारित नोटों की दिशा में काम तेज किया जा रहा है।
पॉलीमर नोट बनाने की तैयारी तेज
BRBNMPL ने 17 जुलाई को जारी EOI के जरिए ऐसी कंपनियों से रुचि मांगी है, जिन्हें सिक्योरिटी-ग्रेड पॉलीमर सब्सट्रेट तैयार करने का अनुभव हो। यही विशेष प्लास्टिक सामग्री बैंक नोटों की छपाई में इस्तेमाल की जाती है और इसे सामान्य प्लास्टिक से कहीं अधिक सुरक्षित एवं टिकाऊ माना जाता है।
इस पहल का उद्देश्य केवल विदेशों से सामग्री मंगाना नहीं, बल्कि तकनीक हस्तांतरण (Technology Transfer) के जरिए भारत में ही पॉलीमर सब्सट्रेट का निर्माण शुरू करना है। इससे भविष्य में देश में ही प्लास्टिक नोट तैयार करने का रास्ता आसान हो सकता है।
EOI का क्या मतलब है?
विशेषज्ञों के अनुसार, EOI यानी Expression of Interest किसी कंपनी को सीधा उत्पादन या आपूर्ति का ऑर्डर नहीं होता। इसका मकसद संभावित तकनीकी साझेदारों की पहचान करना और यह समझना होता है कि कौन-सी कंपनियां इस परियोजना में सहयोग कर सकती हैं।
यानी फिलहाल RBI या BRBNMPL ने प्लास्टिक नोटों के बड़े पैमाने पर उत्पादन की घोषणा नहीं की है, बल्कि यह तकनीकी सहयोग और निर्माण क्षमता विकसित करने की दिशा में शुरुआती कदम है।
प्लास्टिक के नोट क्यों माने जाते हैं बेहतर?
पॉलीमर नोटों की सबसे बड़ी खासियत उनकी मजबूती होती है। ये कागज के नोटों की तुलना में अधिक समय तक उपयोग में बने रहते हैं और आसानी से फटते नहीं हैं। इसके अलावा ये पानी, नमी और धूल-मिट्टी से भी काफी हद तक सुरक्षित रहते हैं।
इन नोटों में आधुनिक सुरक्षा फीचर भी बेहतर तरीके से जोड़े जा सकते हैं, जिससे नकली नोटों पर नियंत्रण में मदद मिलती है। लंबे समय तक चलने के कारण इनकी रिप्लेसमेंट लागत भी कम हो सकती है।
दुनिया के 60 से अधिक देशों में पॉलीमर नोटों का उपयोग किया जा रहा है। कई देशों ने इन्हें उनकी टिकाऊ गुणवत्ता, बेहतर सुरक्षा और कम रखरखाव लागत के कारण अपनाया है। भारत भी अब इसी दिशा में कदम बढ़ाता नजर आ रहा है।















