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Friday, April 17, 2026
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महाकाल मंदिर में VIP एंट्री पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से किया इनकार, जानें क्या है पूरा मामला

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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर के गर्भगृह में VIP को प्रवेश देने के अधिकार को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। अदालत ने साफ कहा कि यह तय करना न्यायालय का काम नहीं है कि मंदिर में किसे प्रवेश मिलना चाहिए और किसे नहीं।

यह याचिका उज्जैन निवासी दर्पण अवस्थी ने वकील विष्णु शंकर जैन के जरिए दायर की थी। याचिका में उस व्यवस्था को चुनौती दी गई थी, जिसमें कुछ खास लोगों को आम श्रद्धालुओं से अलग गर्भगृह में पूजा-अर्चना की विशेष सुविधा दी जाती है। इसके साथ ही मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के 28 अगस्त 2025 के उस फैसले को भी चुनौती दी गई थी, जिसमें इस मुद्दे पर दाखिल जनहित याचिका को खारिज कर दिया गया था।

मामले की सुनवाई भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस आर. महादेवन और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने की। संक्षिप्त सुनवाई के बाद अदालत ने याचिकाकर्ता के वकील को याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी और कहा कि वह अपनी बात संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों के सामने रखें।

महाकाल की मौजूदगी में कोई VIP नहीं – कोर्ट

सुनवाई के दौरान कोर्ट की टिप्पणी काफी अहम रही। पीठ ने कहा, “महाकाल की मौजूदगी में कोई VIP नहीं हो सकता।” साथ ही यह भी कहा गया कि मंदिर प्रबंधन में न्यायालय के हस्तक्षेप की एक सीमा होती है। अदालत ने स्पष्ट किया कि मंदिर की व्यवस्था से जुड़े ऐसे फैसले वही लोग करेंगे, जो वहां की व्यवस्थाएं संभालते हैं।

वकील विष्णु शंकर जैन ने दलील दी थी कि गर्भगृह में प्रवेश के मामले में सभी श्रद्धालुओं के साथ समान व्यवहार होना चाहिए। VIP दर्जे के आधार पर किसी को विशेष अधिकार नहीं मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि या तो सभी के लिए गर्भगृह में प्रवेश पर रोक हो या फिर सभी को समान अवसर मिले।

उन्होंने यह भी तर्क दिया कि वर्तमान व्यवस्था संविधान के अनुच्छेद 14, यानी समानता के अधिकार का उल्लंघन करती है। जैन का कहना था कि गर्भगृह में प्रवेश के लिए एक समान गाइडलाइन और स्थायी नीति बनाई जानी चाहिए।

इस पर प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि अगर गर्भगृह के भीतर मौलिक अधिकारों को सख्ती से लागू किया गया, तो इसके अनचाहे परिणाम हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि अगर अनुच्छेद 14 लागू माना गया तो आगे लोग अनुच्छेद 19 जैसे अन्य मौलिक अधिकारों की भी मांग करने लगेंगे। इससे मंदिरों की आंतरिक व्यवस्था पर असर पड़ेगा।

VIP एंट्री होना चाहिए या नहीं यह अदालत तय नहीं करेगी

कोर्ट ने दो टूक कहा कि VIP एंट्री की अनुमति होनी चाहिए या नहीं, यह अदालत तय नहीं करेगी। यह फैसला मंदिर प्रशासन और स्थानीय व्यवस्था संभालने वालों का है।

यह मामला महाकाल मंदिर से जुड़ा है, जहां गर्भगृह में प्रवेश को लेकर पहले भी विवाद सामने आते रहे हैं। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के इस रुख के बाद यह साफ हो गया है कि इस विषय में न्यायालय हस्तक्षेप नहीं करेगा।

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