मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य के संविदा कर्मचारियों और अधिकारियों को बड़ी राहत देते हुए उनके वार्षिक मानदेय में वृद्धि को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सरकार के इस फैसले से लगभग 1.25 लाख संविदा कर्मियों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। यह बढ़ोतरी 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी मानी जाएगी।
सरकार का यह निर्णय वर्ष 2023 में लागू की गई संविदा रोजगार नीति के तहत लिया गया है। इस नीति में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के आधार पर हर वर्ष वेतन संशोधन का प्रावधान रखा गया है। इसी व्यवस्था के तहत इस बार वेतन वृद्धि की दर 4.46 प्रतिशत तय की गई है।
पिछले साल से ज्यादा बढ़ी वेतन वृद्धि
वित्त विभाग के अनुसार इस वर्ष स्वीकृत 4.46 प्रतिशत की वृद्धि पिछले वर्ष की तुलना में अधिक है। इससे पहले संविदा कर्मचारियों को 2.94 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि का लाभ दिया गया था। सरकार का कहना है कि बढ़ती महंगाई को देखते हुए कर्मचारियों को अतिरिक्त राहत देने का प्रयास किया गया है।
कर्मचारी संगठनों का मानना है कि नए फैसले के बाद विभिन्न पदों पर कार्यरत कर्मियों के वेतन में लगभग 1,000 रुपये से 2,500 रुपये प्रतिमाह तक की बढ़ोतरी हो सकती है। वास्तविक लाभ संबंधित वेतनमान और पद के आधार पर तय होगा।
समान पदों पर समान वेतन की व्यवस्था
संविदा रोजगार नीति लागू होने से पहले अलग-अलग विभागों में एक ही प्रकार के पदों पर कार्यरत कर्मचारियों को अलग-अलग वेतन मिलता था। नई नीति के तहत समान पदों के लिए एक समान वेतन संरचना लागू की गई है, जिससे वेतन संबंधी असमानताओं को कम किया गया है।
वर्तमान व्यवस्था के अनुसार संविदा कर्मचारियों का मासिक वेतन पद के अनुसार निर्धारित है। इसमें निम्न श्रेणी के पदों से लेकर तकनीकी और प्रबंधकीय पदों तक अलग-अलग वेतनमान तय किए गए हैं। कर्मचारी संगठनों ने मांग की है कि जिन विभागों में अभी तक नई संविदा नीति पूरी तरह लागू नहीं हुई है, वहां भी संशोधित वेतन का लाभ जल्द दिया जाए।


















