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Digvijaya Singh Padayatra: राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर दिग्विजय सिंह का बड़ा ऐलान, महाकाल से अयोध्या तक करेंगे पदयात्रा

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Digvijaya Singh News: कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर चढ़ावा विवाद को लेकर 2 अक्टूबर से उज्जैन के महाकाल मंदिर से अयोध्या तक गैर-राजनीतिक पदयात्रा निकालने का ऐलान किया। साथ ही दान राशि वापसी के लिए कोर्ट जाने की बात भी कही।

Digvijaya Singh Padayatra: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर में चढ़ावे और दान से जुड़े कथित अनियमितता के मुद्दे पर बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि वह 2 अक्टूबर, गांधी जयंती के दिन उज्जैन स्थित महाकाल मंदिर से अयोध्या तक पैदल यात्रा शुरू करेंगे।

भोपाल स्थित अपने सरकारी आवास पर मीडिया से बातचीत के दौरान दिग्विजय सिंह ने कहा कि उन्होंने अपने घर के बाहर एक बैनर लगाया है, जिसमें चंदा और चढ़ावा चोरी के आरोपों का उल्लेख करते हुए ऐसे लोगों के प्रवेश पर रोक की बात लिखी गई है। उन्होंने कहा कि इसी तरह के संदेश देश के अन्य मंदिरों के बाहर भी लगाए जाने चाहिए, ताकि श्रद्धालु जागरूक रहें।

कांग्रेस नेता ने यह भी दोहराया कि वह अयोध्या की अदालत में याचिका दायर कर राम मंदिर निर्माण के लिए दिए गए अपने दान की राशि वापस मांगेंगे। उनका आरोप है कि यदि दान का गलत इस्तेमाल हुआ है तो दानदाताओं को न्याय मिलना चाहिए।

दिग्विजय सिंह ने कहा कि उनकी पदयात्रा लगभग एक हजार किलोमीटर लंबी होगी और वह प्रतिदिन 10 से 15 किलोमीटर पैदल चलेंगे। इस यात्रा में वही लोग शामिल हो सकते हैं, जिनकी भगवान राम में आस्था है और जिन्होंने मंदिर निर्माण के लिए दान दिया था। उनका दावा है कि इस यात्रा का किसी राजनीतिक गतिविधि से कोई संबंध नहीं होगा।

लालकृष्ण आडवाणी की रथयात्रा के दौरान भी दिया था चंदा

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी की रथयात्रा के दौरान भी राम मंदिर निर्माण के लिए चंदा दिया था। उनके अनुसार, उस समय जुटाए गए धन का कभी सार्वजनिक हिसाब नहीं दिया गया। बाद में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद जब दोबारा चंदा अभियान चलाया गया, तब उन्होंने सीधे श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण के लिए 1 लाख 11 हजार रुपये का योगदान दिया।

दिग्विजय सिंह ने उज्जैन के महाकाल मंदिर से जुड़े एक पुराने भूमि विवाद का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में मंदिर के पास की बहुमूल्य जमीन एक संगठन को आवंटित की गई थी। उन्होंने दावा किया कि बाद में उनकी सरकार ने इस पर आपत्ति जताई थी।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उस भूमि पर संचालित एक स्कूल को हटाकर होटल निर्माण की तैयारी की जा रही है। इस पूरे मामले की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और संबंधित तथ्यों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए।

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