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Sunday, April 19, 2026
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बिहार की नई सरकार में भाजपा का बड़ा शक्ति प्रदर्शन, नीतीश की टीम में सबसे ज्यादा मंत्री

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बिहार की राजनीति एक बार फिर बड़ा मोड़ ले चुकी है। नीतीश कुमार ने दसवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर इतिहास रच दिया है लेकिन इस बार सत्ता का समीकरण बदल चुका है। नई सरकार के गठन में भाजपा ने अपनी पकड़ पहले से कहीं अधिक मजबूत कर ली है। अब तक जूनियर पार्टनर रहने वाली भाजपा के खाते में इस बार चौदह मंत्री गए हैं जबकि जदयू को केवल आठ मंत्री पद मिले हैं। यह बदलाव इस बात का संकेत है कि नई सरकार में भाजपा नेतृत्व ने अपनी रणनीति के साथ मजबूत ढंग से बातचीत की और अधिक प्रतिनिधित्व हासिल कर लिया।

भाजपा का बढ़ा दबदबा

नई सरकार में भाजपा को लाभ देने वाले कई फैसले लिए गए हैं। पहला फायदा विधानसभा अध्यक्ष का पद है जो भाजपा के पास जाने वाला है। दूसरा फायदा यह है कि दो उपमुख्यमंत्री बनाए गए हैं जबकि माना जा रहा था कि नीतीश कुमार इस फार्मूले पर राजी नहीं होंगे। इसके बावजूद सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा की डिप्टी सीएम के तौर पर ताजपोशी भाजपा के लिए बड़ा राजनीतिक लाभ है।

भाजपा ने मंत्री पदों में सामाजिक संतुलन को भी प्राथमिकता दी है। लवकुश समाज और अगड़ा वर्ग को सबसे पहले प्रतिनिधित्व दिया गया है। सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा इसी सामाजिक समीकरण के हिसाब से चुने गए हैं। ब्राह्मण समाज से मंगल पांडेय और कायस्थ समुदाय से नितिन नबीन को मंत्री बनाया गया है।

इसके साथ ही संजय सिंह टाइगर, अरुण शंकर प्रसाद, सुरेंद्र मेहता, रमा निषाद, लखेंद्र पासवान, नारायण प्रसाद, श्रेयसी सिंह और प्रमोद कुमार चंद्रवंशी जैसे नेताओं को भी जगह मिली है।

सहयोगी दलों की हिस्सेदारी

नई सरकार में भाजपा और जदयू के अलावा सहयोगी दलों को भी प्रतिनिधित्व दिया गया है। चिराग पासवान की लोजपा आर को दो मंत्री पद मिले हैं। जीतन राम मांझी की हम को एक पद मिला है और उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोकमोर्चा को भी एक मंत्री पद दिया गया है।

सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि मांझी और कुशवाहा दोनों ने अपने बेटों को ही मंत्री बनवाया है। मांझी ने अपने बेटे संतोष सुमन को कैबिनेट में जगह दिलाई है जबकि उपेंद्र कुशवाहा ने अपने बेटे दीपक प्रकाश को मंत्री पद दिलवाया है।

इस बीच यह भी ध्यान देने वाली बात है कि नीतीश मिश्रा इस बार कैबिनेट में शामिल नहीं किए गए हैं। पिछली सरकार में वे उद्योग मंत्री थे और उनकी दोबारा एंट्री की चर्चा थी क्योंकि वे बड़े अंतर से चुनाव जीते थे। इसके बावजूद उन्हें मौका नहीं मिल पाया जिससे कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

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