तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद अभिषेक बनर्जी को एक पुराने मामले में बड़ा कानूनी झटका लगा है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ जारी गिरफ्तारी वारंट पर लगी रोक को समाप्त कर दिया है, जिसके बाद उनकी कानूनी परेशानियां बढ़ सकती हैं।
अदालत के इस फैसले के बाद अब मामले में आगे की कार्रवाई का रास्ता साफ माना जा रहा है। वहीं राजनीतिक गलियारों में भी इस फैसले को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका
जानकारी के अनुसार, अभिषेक बनर्जी ने अपने खिलाफ जारी गिरफ्तारी वारंट को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का रुख किया था। हालांकि अदालत ने उनकी याचिका को स्वीकार नहीं किया और पहले से लागू अंतरिम राहत को भी समाप्त कर दिया।
अदालत ने सुनवाई के दौरान यह भी टिप्पणी की कि याचिकाकर्ता की ओर से मामले में अपेक्षित रुचि नहीं दिखाई गई, जिसके चलते पूर्व में दी गई राहत को जारी रखने का कोई आधार नहीं बनता।
गिरफ्तारी की संभावना बढ़ी
हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब मध्य प्रदेश की संबंधित एजेंसियां आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर सकती हैं। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि उच्च अदालत से कोई नई राहत नहीं मिलती है, तो गिरफ्तारी वारंट के आधार पर कार्रवाई की जा सकती है।
यह पूरा मामला एक चुनावी सभा के दौरान दिए गए कथित बयान से जुड़ा बताया जा रहा है। आरोप है कि राजनीतिक भाषण के दौरान की गई एक टिप्पणी को लेकर मानहानि का मामला दर्ज कराया गया था।
शिकायतकर्ता पक्ष ने अदालत में दावा किया था कि बयान से उनकी सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंचा है। इसी मामले में बाद में कानूनी कार्रवाई शुरू हुई और गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया।
मामले में पहले हाईकोर्ट की ओर से गिरफ्तारी वारंट पर अस्थायी रोक लगा दी गई थी। इसी राहत के आधार पर आगे की कार्रवाई रुकी हुई थी। अब अदालत द्वारा वह रोक हटाए जाने के बाद मामला फिर से सक्रिय हो गया है।
पश्चिम बंगाल में भी बढ़ीं चुनौतियां
इस बीच पश्चिम बंगाल में भी अभिषेक बनर्जी के खिलाफ कुछ नई शिकायतें दर्ज होने की खबरें सामने आई हैं। बताया जा रहा है कि राजनीतिक विवादों से जुड़े मामलों में स्थानीय स्तर पर पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया शुरू की है। हालांकि इन मामलों में अभी जांच और कानूनी कार्रवाई प्रारंभिक चरण में है।

















