Iran News: ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला सैयद अली खामनेई के राजकीय अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुक्रवार से राजधानी तेहरान में शुरू हो गई। इस मौके पर दुनिया के कई देशों के प्रतिनिधि ईरान पहुंचे हैं। भारत की ओर से भी राजनीतिक और सरकारी स्तर पर प्रतिनिधिमंडल अंतिम श्रद्धांजलि देने के लिए तेहरान पहुंचा है। ईरान स्थित भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर तस्वीरें और वीडियो साझा कर इसकी जानकारी दी।
तेहरान के ग्रैंड मोसल्ला में अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में विदेशी मेहमानों और स्थानीय नागरिकों का पहुंचना लगातार जारी है। समारोह के दौरान सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं।
भारत से पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती और कांग्रेस के विदेश मामलों के विभाग के प्रमुख सलमान खुर्शीद भी तेहरान पहुंचे। जानकारी के अनुसार, महबूबा मुफ्ती गुरुवार शाम नई दिल्ली से रवाना हुई थीं।
भारत सरकार की ओर से भी आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल ईरान पहुंचा है। विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा और बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन शुक्रवार सुबह दिल्ली से तेहरान के लिए रवाना हुए। ईरानी मीडिया द्वारा जारी वीडियो में भारत के हिंदू, मुस्लिम और सिख धर्मगुरुओं को दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि अर्पित करते और प्रार्थना करते हुए देखा गया।
अंतिम विदाई देने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ी
तेहरान की सड़कों पर अंतिम विदाई के लिए हजारों लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। काले वस्त्र पहने लोग ईरानी झंडे लहराते हुए और धार्मिक गीत गाते हुए अंतिम यात्रा में शामिल हुए। अयातुल्ला अली खामनेई का पार्थिव शरीर शुक्रवार तड़के ग्रैंड मोसल्ला लाया गया, जहां श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया।
दिवंगत नेता के ताबूत को इमाम हुसैन की दरगाह से लाए गए पवित्र लाल झंडे से ढका गया है। ईरानी सरकार ने इसे प्रतिरोध, बलिदान और सत्य का प्रतीक बताया है। इस अवसर पर राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि यह देश के लिए दुखद क्षण है, लेकिन राष्ट्रीय एकता और मजबूती का नया अध्याय भी साबित होगा।
अधिकारियों के अनुसार, अंतिम संस्कार की पूरी प्रक्रिया 4 जुलाई से 9 जुलाई तक चलेगी। इस दौरान तेहरान के अलावा कोम, मशहद, नजफ और कर्बला सहित कई प्रमुख शहरों में भी श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
रिपोर्ट के मुताबिक, अयातुल्ला अली खामनेई का निधन करीब चार महीने पहले 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के बीच संघर्ष के दौरान हुए एक हवाई हमले में हुआ था। उनके पार्थिव शरीर को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए रासायनिक एम्बामिंग की बजाय कम तापमान वाले कोल्ड स्टोरेज का उपयोग किया गया। इस्लामी परंपराओं में रसायनों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध है, जबकि शिया धार्मिक कानून विशेष परिस्थितियों में शव को कोल्ड स्टोरेज में सुरक्षित रखने और अंतिम संस्कार में देरी की अनुमति देता है।

















