MP UCC News: मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में सरकार तेजी से आगे बढ़ रही है। यूसीसी का मसौदा तैयार करने के लिए गठित उच्चस्तरीय समिति ने भोपाल में विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों, राजनीतिक दलों, धर्मगुरुओं, सरकारी विभागों और आयोगों के सदस्यों से सुझाव लेकर परामर्श प्रक्रिया का अंतिम चरण पूरा किया। माना जा रहा है कि राज्य सरकार आगामी विधानसभा मानसून सत्र में यूसीसी विधेयक पेश कर सकती है।
भोपाल स्थित प्रशासन अकादमी में पूरे दिन चली बैठकों में समाज के अलग-अलग वर्गों की राय ली गई। समिति का उद्देश्य विधेयक को अंतिम रूप देने से पहले अधिक से अधिक पक्षों के सुझावों को शामिल करना है।
बैठक में विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने अपने विचार समिति के समक्ष रखे। इसके अलावा हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई और बौद्ध समुदाय के धर्मगुरुओं ने भी प्रस्तावित कानून को लेकर अपने सुझाव दिए।
सरकारी विभागों के अधिकारियों ने भी विवाह, तलाक, गोद लेने, उत्तराधिकार और पारिवारिक कानूनों से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर प्रस्तुति दी। समिति ने सभी सुझावों को रिकॉर्ड कर आगे की प्रक्रिया के लिए सुरक्षित रखा है।
विशेषज्ञों की टीम कर रही मंथन
यूसीसी मसौदा तैयार करने वाली समिति की अध्यक्षता रिटायर्ड जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं। समिति में प्रशासन, कानून, शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ भी शामिल हैं।
समिति के सदस्यों ने विभिन्न वर्गों की राय सुनने के बाद कहा कि किसी भी कानून को लागू करने से पहले समाज की अपेक्षाओं और चिंताओं को समझना जरूरी है।
समिति के सदस्यों के अनुसार यूसीसी को लेकर बनाई गई विशेष वेबसाइट पर बड़ी संख्या में लोगों ने अपने सुझाव भेजे हैं। ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से प्राप्त सुझावों का अध्ययन किया जा रहा है।
विशेष रूप से पारिवारिक कानूनों, विवाह संबंधी नियमों, तलाक, बच्चों के अधिकार और गोद लेने की प्रक्रिया से जुड़े विषयों पर लोगों ने विस्तार से अपनी राय रखी है।
आदिवासी समुदाय को लेकर उठी मांग
परामर्श प्रक्रिया के दौरान अनुसूचित जनजातियों को यूसीसी के दायरे से बाहर रखने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। कई प्रतिनिधियों ने आदिवासी समाज की पारंपरिक व्यवस्थाओं और सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।
समिति के सदस्यों ने कहा कि इस विषय पर प्राप्त सभी सुझावों का गंभीरता से परीक्षण किया जाएगा।
बैठक के दौरान कुछ धर्मगुरुओं ने लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े प्रावधानों पर आपत्ति जताई और अपने विचार समिति के सामने रखे। वहीं विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधियों ने धार्मिक स्वतंत्रता और सांस्कृतिक परंपराओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग भी की।
कांग्रेस ने उठाए सवाल
इस बीच कांग्रेस ने यूसीसी को लेकर सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि प्रदेश में बेरोजगारी, महंगाई, किसानों की समस्याएं और आदिवासी समुदाय से जुड़े मुद्दे ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। कांग्रेस नेताओं ने सरकार से पूछा है कि आदिवासी समाज के अधिकारों, परंपराओं और संवैधानिक सुरक्षा को लेकर स्पष्ट नीति क्या होगी।
मानसून सत्र पर टिकी नजर
राज्य सरकार पहले ही संकेत दे चुकी है कि यूसीसी से जुड़ा विधेयक विधानसभा के मानसून सत्र में लाया जा सकता है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी हाल के दिनों में कहा था कि सरकार इस दिशा में गंभीरता से काम कर रही है।
अब सभी की नजर 20 जुलाई से शुरू होने वाले विधानसभा सत्र पर है, जहां यूसीसी को लेकर बड़ा राजनीतिक और विधायी घटनाक्रम देखने को मिल सकता है।



















