मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला परिसर को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। हिंदू संगठन “हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस” ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए केंद्र और राज्य सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है। संगठन का आरोप है कि हाईकोर्ट के निर्देशों के बावजूद जमीन पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो रही है।
संगठन ने केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर अपनी चिंताओं से अवगत कराया है। पत्र में कहा गया है कि अदालत के आदेशों के बाद भी पूजा-अर्चना और अन्य धार्मिक गतिविधियों को लेकर स्पष्ट व्यवस्था नहीं बनाई गई है, जिससे लोगों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
दिशा-निर्देश जारी नहीं होने पर नाराजगी
हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस के पदाधिकारियों का कहना है कि हाईकोर्ट के फैसले के बाद संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने थे, लेकिन काफी समय बीत जाने के बावजूद स्थानीय स्तर पर कोई स्पष्ट मानक प्रक्रिया लागू नहीं की गई। संगठन का आरोप है कि इस देरी के कारण श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के बीच असंतोष बढ़ रहा है।
संगठन ने अपने पत्र में कुछ हालिया घटनाओं का भी जिक्र किया है। उनका दावा है कि परिसर में लगाए गए धार्मिक ध्वज और स्थापित की गई प्रतिमा को बाद में हटाया गया, जिससे श्रद्धालुओं की भावनाएं प्रभावित हुई हैं। इसके अलावा संस्कृत शिक्षण और धार्मिक गतिविधियों में बाधा पहुंचाने के आरोप भी लगाए गए हैं।
संगठन का कहना है कि संबंधित अधिकारी उच्च स्तर से मिले निर्देशों को लागू करने में अपेक्षित तत्परता नहीं दिखा रहे हैं। उनका आरोप है कि विभिन्न प्रशासनिक कारणों का हवाला देकर फैसलों को टालने की कोशिश की जा रही है, जिससे विवाद और बढ़ता जा रहा है।
आंदोलन शुरू करने की दी चेतावनी
हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही स्थिति स्पष्ट नहीं की गई और अदालत व प्रशासनिक आदेशों का प्रभावी पालन सुनिश्चित नहीं हुआ, तो संगठन देशभर में जनजागरण अभियान और आंदोलन शुरू करने पर विचार करेगा। संगठन का कहना है कि वह इस मुद्दे को व्यापक स्तर पर उठाएगा।

















