विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने भारत की सुरक्षा और आतंकवाद से जुड़े मुद्दों पर यूरोपीय देशों के समक्ष स्पष्ट रुख रखते हुए कहा है कि भारत के खिलाफ किए गए कुछ हमलों में यूरोप में निर्मित हथियारों का इस्तेमाल हुआ है। उनके इस बयान को अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा सहयोग और रक्षा निर्यात नीतियों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
जयशंकर ने कहा कि आतंकवाद और सीमा पार हिंसा से प्रभावित देशों की चिंताओं को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उन्होंने संकेत दिया कि जिन हथियारों का निर्माण यूरोप में होता है, उनके अंतिम उपयोग और गंतव्य पर भी सतर्क निगरानी जरूरी है ताकि वे गलत हाथों में न पहुंचें।
सुरक्षा चिंताओं को लेकर भारत का रुख
विदेश मंत्री ने कहा कि भारत लंबे समय से आतंकवाद और सीमा पार गतिविधियों का सामना करता रहा है। ऐसे में वैश्विक समुदाय की जिम्मेदारी है कि वह आतंकवाद के खिलाफ एक समान और प्रभावी नीति अपनाए।
उन्होंने यह भी कहा कि सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर दोहरे मानदंड अपनाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। भारत लगातार यह मांग करता रहा है कि आतंकवाद को किसी भी रूप में समर्थन या संरक्षण नहीं मिलना चाहिए।
जयशंकर के बयान को रक्षा उपकरणों के निर्यात और उनकी निगरानी के मुद्दे से भी जोड़कर देखा जा रहा है। उन्होंने संकेत दिया कि हथियारों की आपूर्ति करने वाले देशों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके उत्पाद अंतरराष्ट्रीय नियमों और जिम्मेदार उपयोग के मानकों के अनुरूप ही इस्तेमाल हों।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक सुरक्षा माहौल में हथियारों की आपूर्ति, निगरानी और जवाबदेही का मुद्दा लगातार महत्वपूर्ण होता जा रहा है। भारत भी लंबे समय से इस विषय पर अपनी चिंताएं विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाता रहा है।
आतंकवाद पर वैश्विक सहयोग की जरूरत
विदेश मंत्री ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई केवल किसी एक देश की जिम्मेदारी नहीं है। इसके लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समन्वित प्रयास और स्पष्ट राजनीतिक इच्छाशक्ति की आवश्यकता है।
भारत का मानना है कि आतंकवाद से जुड़े नेटवर्क, वित्तीय सहायता और हथियारों की उपलब्धता को रोकने के लिए सभी देशों को मिलकर काम करना होगा। जयशंकर का यह बयान ऐसे समय आया है जब वैश्विक सुरक्षा और क्षेत्रीय संघर्षों को लेकर कई देशों के बीच चर्चा जारी है।
















