संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत ने पाकिस्तान को एक बार फिर तीखा जवाब दिया है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरीश पर्वतनेनी ने पाकिस्तान द्वारा जम्मू-कश्मीर मुद्दा उठाने पर कहा कि जिस देश का इतिहास नरसंहार और आतंक से जुड़ा रहा हो, उसे भारत के आंतरिक मामलों पर बोलने का कोई अधिकार नहीं है।
UNSC में हुई बहस के दौरान भारत ने पाकिस्तान के हालिया और पुराने घटनाक्रमों का उल्लेख करते हुए मानवाधिकार और अंतरराष्ट्रीय कानून के मुद्दों पर उसे घेरा।
अफगानिस्तान हमले का जिक्र
हरीश पर्वतनेनी ने कहा कि दुनिया अभी तक पाकिस्तान द्वारा इसी साल मार्च में अफगानिस्तान में किए गए हवाई हमलों को नहीं भूली है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र मिशन (UNAMA) का हवाला देते हुए कहा कि काबुल के एक अस्पताल पर हुए हमले में सैकड़ों नागरिक प्रभावित हुए थे।
भारत ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान लंबे समय से सीमा पार हिंसा और आतंकी गतिविधियों का सहारा लेकर अपनी आंतरिक समस्याओं से ध्यान हटाने की कोशिश करता रहा है।
1971 का भी किया जिक्र
भारतीय प्रतिनिधि ने 1971 के दौरान पाकिस्तान सेना की कार्रवाई का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दुनिया ने ऑपरेशन सर्चलाइट के दौरान हुए अत्याचारों को देखा है और ऐसे इतिहास वाले देश को मानवाधिकारों पर भाषण देने से पहले आत्ममंथन करना चाहिए।
भारत ने कहा कि पाकिस्तान की नीतियों के कारण क्षेत्रीय शांति और स्थिरता लगातार प्रभावित होती रही है। साथ ही यह भी कहा गया कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय अब पाकिस्तान के प्रचार और बयानबाजी को समझ चुका है।
जम्मू-कश्मीर पर दोटूक रुख
भारत ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है और यह पूरी तरह भारत का आंतरिक मामला है। भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि पाकिस्तान को पहले अपने रिकॉर्ड पर ध्यान देना चाहिए, बजाय इसके कि वह अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत के खिलाफ गलत आरोप लगाए।
राजनयिक हलकों में भारत के इस बयान को पाकिस्तान के खिलाफ मजबूत और आक्रामक कूटनीतिक जवाब के रूप में देखा जा रहा है।


















