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क्यों भाजपा ने नितिन नवीन को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया? क्या है पीछे की रणनीति?

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भारतीय जनता पार्टी ने बिहार सरकार के मंत्री नितिन नवीन को पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त करके एक बड़ा संगठनात्मक फैसला किया है। यह भाजपा के इतिहास में दूसरा मौका है जब किसी नेता को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है, इससे पहले 2019 में जेपी नड्डा को यह भूमिका दी गई थी।

माना जा रहा है कि नितिन नवीन को इस पद पर नियुक्त करने के पीछे रणनीति यह है कि वे जेपी नड्डा के सहयोग से अध्यक्ष के तौर पर कामकाज को समझें और भविष्य में पूर्ण रूप से राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल सकें। जेपी नड्डा 2019 से लगातार भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे हैं और उनका कार्यकाल काफी लंबा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 16 दिसंबर से शुरू हो रहे खरमास के कारण, जिसे शुभ कार्यों के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता, भाजपा मकर संक्रांति के बाद ही नए अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया शुरू कर सकती है। पार्टी पहले ही 37 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में संगठन चुनाव पूरे कर चुकी है, जो राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनाव के लिए आवश्यक शर्त है।

नितिन नवीनन की नियुक्ति महत्वपूर्ण

नितिन नवीन का चयन कई मायनों में महत्वपूर्ण है। वह महज 45 वर्ष के हैं और उनके पास अध्यक्ष पद पर लंबा कार्यकाल देने की संभावना है। उनके पिता बिहार भाजपा के संस्थापक सदस्यों में से थे, जिससे उनका दो पीढ़ियों से संगठन से जुड़ाव रहा है। सूत्रों के अनुसार आरएसएस भी उनके नाम पर सहमत है।

नितिन नवीन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने की औपचारिक प्रक्रिया 3-4 दिनों में पूरी होने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि उन्हें कार्यकारी अध्यक्ष बनाना एक औपचारिकता भर है और वह वास्तव में राष्ट्रीय अध्यक्ष ही बनाए गए हैं, बस अंतिम मुहर लगना बाकी है।

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