कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कहा कि महात्मा गांधी सनातनी हिंदू थे और अपने जीवन में सनातन परंपराओं का पालन करते थे। उज्जैन से अयोध्या तक प्रस्तावित ‘सत्य सनातन स्वाभिमान पदयात्रा’ से पहले उन्होंने खुद को गांधी से प्रेरित सनातनी बताया और कहा कि वह आखिरी सांस तक कांग्रेसी रहेंगे।
सिंह 20 अक्टूबर को दशहरे के दिन उज्जैन के महाकाल मंदिर से यात्रा शुरू करेंगे। करीब 950 से 1,000 किलोमीटर की यह पदयात्रा अयोध्या में राम मंदिर पहुंचकर समाप्त होगी। उन्होंने इसे ‘शिवधाम से रामधाम’ की यात्रा बताया है।
गांधी को बताया वैचारिक आदर्श
दिग्विजय सिंह ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखे संदेश में कहा कि वह कांग्रेस में हैं और आगे भी पार्टी के साथ रहेंगे। उन्होंने नेहरू-गांधी परिवार के प्रति अपनी निष्ठा का जिक्र करते हुए कहा कि उनके राजनीतिक जीवन में उन्हें जो कुछ मिला, वह इंदिरा गांधी, संजय गांधी, राजीव गांधी और सोनिया गांधी से मिला।
उन्होंने महात्मा गांधी को अपना वैचारिक आदर्श बताते हुए कहा कि गांधी ने भारत की आत्मा को समझा और उसका अनुसरण किया। उनके मुताबिक, गांधी सनातनी हिंदू थे और उनके जीवन में सनातन परंपराओं का पालन दिखाई देता था। उन्होंने हिंदू-मुस्लिम एकता के लिए गांधी के प्रयासों का भी उल्लेख किया।
उन्होंने राहुल गांधी की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि राहुल देश के हर वर्ग के लोगों के दुख-दर्द को समझने की कोशिश कर रहे हैं। संसद में विपक्ष के नेता के तौर पर उन्होंने भारतीय संविधान और संवैधानिक संस्थाओं पर कथित कब्जे का विरोध किया है। इस संदर्भ में सिंह ने भाजपा, आरएसएस, विश्व हिंदू परिषद और उनसे जुड़े संगठनों की आलोचना की।
धर्म के नाम पर भ्रष्टाचार के खिलाफ जनजागरण का दावा
दिग्विजय सिंह ने पदयात्रा का उद्देश्य धर्म के नाम पर कथित भ्रष्टाचार और आस्था के राजनीतिक इस्तेमाल के खिलाफ जनजागरण करना बताया है। उनका कहना है कि सनातन धर्म की मूल भावना को लेकर गलत धारणा बनाई जा रही है। उन्होंने ‘वसुधैव कुटुंबकम’ के संदेश का जिक्र करते हुए कहा कि भारत की ताकत अनेकता में एकता है।
यात्रा के ऐलान के समय 80 वर्ष की उम्र में इतनी लंबी पदयात्रा करने के सवाल पर सिंह ने कहा था कि उम्र उनके लिए बाधा नहीं है और वह खुद को 50 साल का महसूस करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यात्रा गैर-राजनीतिक होगी और आस्था तथा धार्मिक मूल्यों की रक्षा में विश्वास रखने वाला हर वर्ग, पंथ और विचारधारा का व्यक्ति इसमें शामिल हो सकता है।
उन्होंने आरएसएस और विश्व हिंदू परिषद पर सनातन धर्म की मूल भावना को बिगाड़ने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि वह इन संगठनों की विचारधारा से सहमत नहीं हैं, लेकिन राम मंदिर निर्माण के पक्ष में हमेशा रहे हैं। उनके मुताबिक, उन्होंने 1989 में अपनी श्रद्धा के अनुसार योगदान दिया था और बाद में मंदिर निर्माण के लिए भी दान दिया।
राम मंदिर के चंदे, निर्माण और चढ़ावे में कथित अनियमितताओं को लेकर भी सिंह ने अपने पुराने आरोप दोहराए। उन्होंने दावा किया कि मंदिर को मिले चढ़ावे में नकदी, विदेशी मुद्रा और सोने-चांदी के आभूषणों की चोरी या हेराफेरी हुई। सिंह ने एसआईटी जांच का हवाला देते हुए दो से तीन करोड़ रुपये नकद और आभूषणों की चोरी स्वीकार किए जाने की बात कही। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चोरी कैमरों में दर्ज हुई और आठ महीने का सीसीटीवी फुटेज हटा दिया गया।
यात्रा के दौरान उज्जैन, ओरछा और अयोध्या में पार्थिव शिवलिंग बनाए जाएंगे। यात्रा महाकाल मंदिर से आशीर्वाद लेकर शुरू होगी, ओरछा में रामराजा सरकार के दर्शन होंगे और अयोध्या में रामलला के मंदिर पर इसका समापन किया जाएगा।




















