मध्यप्रदेश में किसानों को उनकी सोयाबीन उपज का सही मूल्य सुनिश्चित करने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने भावांतर योजना की शुरुआत कर दी है। इंदौर जिले में गुरुवार से इस योजना के अंतर्गत सोयाबीन की खरीदी शुरू की गई। योजना के पहले ही दिन मंडियों में उत्साहपूर्ण माहौल देखने को मिला। बड़ी संख्या में किसान अपनी उपज लेकर मंडियों में पहुंचे और व्यवस्थित तरीके से बिक्री की प्रक्रिया में शामिल हुए।

मंडियों में पहुंचने वाले किसानों का तिलक लगाकर और पुष्पमाला पहनाकर स्वागत किया गया। किसानों के लिए भोजन, स्वल्पाहार, बैठने और विश्राम की पूरी व्यवस्था भी की गई थी। किसानों ने इन तैयारियों को सराहा और कहा कि सरकार ने फसल विक्रय प्रक्रिया को सम्मानजनक और सरल बनाया है। कई किसानों ने बताया कि उन्हें पहले दिन ही उपज के अच्छे दाम मिले हैं, जिससे उनके चेहरों पर संतोष साफ दिखाई दिया।

खरीदी की शुरुआत के अवसर पर जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, कलेक्टर शिवम वर्मा, विधायक मधु वर्मा और अन्य जनप्रतिनिधि तथा अधिकारी लक्ष्मीबाई मंडी पहुंचे। अधिकारियों ने मंडी में की गई व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया और किसानों से सीधे संवाद भी किया। मंत्री सिलावट ने कहा कि राज्य सरकार किसानों के हित में किए गए वादों को लगातार पूरा कर रही है और भावांतर योजना उसका महत्वपूर्ण हिस्सा है।

योजना के पहले दिन सोयाबीन उपज की बोली प्रक्रिया शुरू हुई, जिसमें सर्वाधिक बोली 4775 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज की गई। कलेक्टर शिवम वर्मा ने बताया कि मंडियों में किसानों की उपज की तुलाई समय पर करने, भुगतान में विलंब न होने तथा उपज विक्रय प्रक्रिया को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। मंडियों में छाया स्थल, पीने के पानी, भोजन और तकनीकी सहायता की व्यवस्था पहले से की गई थी।

रतनखेड़ी के किसान कृष्णा जाधव ने कहा कि भावांतर योजना किसानों के हित में महत्वपूर्ण कदम है। मंडियों में व्यवस्था पहले की तुलना में बेहतर की गई है और कीमत भी उम्मीद के अनुसार मिल रही है। इसी तरह सनावदिया के उमाेश घनश्याम और बसांद्रा के किसान अमन ने भी बताया कि मंडी में उपज की बिक्री प्रक्रिया सुगम रही और उन्हें किसी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा।
सरकार ने सोयाबीन के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य 5328 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है। भावांतर योजना के तहत बाजार मूल्य और एमएसपी के बीच के अंतर की राशि किसानों को सीधे उनके बैंक खातों में 15 दिनों के भीतर हस्तांतरित की जाएगी। इस वर्ष इंदौर जिले में 46 हजार से अधिक किसानों ने भावांतर योजना के लिए पंजीयन कराया है। जिले में सोयाबीन का कुल रकबा 1 लाख 22 हजार हेक्टेयर दर्ज किया गया है। जिले में कुल 7 खरीदी केंद्र बनाए गए हैं, जिनमें लक्ष्मीबाई नगर मंडी, संयोगितागंज, सांवेर, चंद्रावती गंज, गौतमपुरा, देपालपुर और डोंगरगांव शामिल हैं।

















