देश में नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे अभियान में सुरक्षा बलों को एक और बड़ी कामयाबी मिली है। गुरुवार को ओडिशा के कंधमाल जिले के जंगलों में एक जॉइंट ऑपरेशन के दौरान चार नक्सलियों को मार गिराया गया, जिनमें सीपीआई (माओवादी) की सेंट्रल कमेटी के सदस्य गणेश उइके भी शामिल हैं। उइके पर 1.1 करोड़ रुपये का इनाम था और वह ओडिशा में नक्सली गतिविधियों का प्रमुख सूत्रधार माना जाता था।
गृहमंत्री अमित शाह ने कहा – मील का पत्थर
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इस सफलता की जानकारी देते हुए इसे नक्सल मुक्त भारत की दिशा में एक “मील का पत्थर” बताया। उन्होंने कहा, “ओडिशा के कंधमाल में एक बड़े ऑपरेशन में सेंट्रल कमेटी के सदस्य गणेश उइके समेत 6 नक्सलियों को मार गिराया गया है। इस बड़ी सफलता के साथ ओडिशा नक्सलवाद से पूरी तरह खत्म होने की ओर है।” उन्होंने दोहराया कि सरकार 31 मार्च 2026 से पहले नक्सलवाद को जड़ से खत्म करने के लिए दृढ़ संकल्पित है।
कौन था गणेश उइके?
गणेश उइके, जिसे पक्का हनुमंतु, राजेश तिवारी, चमरू और रूपा जैसे कई उपनामों से जाना जाता था। वह तेलंगाना के नलगोंडा जिले का रहने वाला था। वह 69 वर्ष का था और लंबे समय से नक्सली संगठन का एक बड़ा नाम था। पुलिस के मुताबिक, मुठभेड़ में मारी गई दो नक्सली महिलाएं भी हैं। अभी अन्य मारे गए नक्सलियों की पहचान की जा रही है।
ओडिशा के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) योगेश बहादुर खुराना ने कहा कि गणेश उइके ओडिशा में सभी नक्सली ऑपरेशनों को लीड कर रहा था और उसके खात्मे से “ओडिशा में नक्सलवाद की कमर टूट गई है।” उन्होंने बताया कि गंजम जिले की सीमा पर एक बड़ा नक्सल विरोधी जॉइंट ऑपरेशन चल रहा था।
इस जॉइंट ऑपरेशन में यह सफलता मिली। ओडिशा पुलिस केंद्र सरकार द्वारा तय मार्च 2026 की डेडलाइन से पहले ही राज्य को नक्सल मुक्त बनाने के लक्ष्य पर काम कर रही है।





















