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Wednesday, October 21, 2026
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सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल सरकार को लगाई कड़ी फटकार, CJI बोले बेमतलब के बहाने लेकर कोर्ट में मत आओ

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सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए साफ कह दिया कि अस्पष्ट और बेमतलब के कारण लेकर बार-बार अदालत का दरवाजा खटखटाना अब बंद होना चाहिए। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने नाराजगी जताते हुए कहा कि हर दिन कोई न कोई नया बहाना नहीं हो सकता और राज्य सरकार विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया को जानबूझकर देरी से पूरा करने की कोशिश कर रही है।

उन्होंने यह भी याद दिलाया कि अदालत ने अपनी विशेष संवैधानिक शक्तियों का उपयोग करते हुए झारखंड और ओडिशा से न्यायिक अधिकारियों की तैनाती का आदेश दिया है जो मूल रूप से चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र का काम है।

पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने चुनाव आयोग पर आरोप लगाते हुए कहा कि आयोग के अधिकारी न्यायिक अधिकारियों को यह ट्रेनिंग दे रहे हैं कि मतदाताओं के दावों के साथ जमा किए गए कौन से दस्तावेज स्वीकार किए जाएं। सिब्बल का तर्क था कि यह सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश का उल्लंघन है जिसमें कहा गया था कि इस प्रक्रिया के तौर-तरीके कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश द्वारा तय किए जाएंगे।

पीठ सिब्बल के दलील को खारिज किया

हालांकि पीठ ने सिब्बल की इस दलील को पूरी तरह खारिज कर दिया और स्पष्ट किया कि जब अदालत ने हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को तौर-तरीके तय करने का अधिकार दिया था तो उसका मतलब केवल यह था कि कौन सा न्यायिक अधिकारी कहां तैनात होगा और उन्हें क्या सुविधाएं दी जाएंगी। मतदाताओं के दावों और दस्तावेजों की वैधता पर फैसला करने का अधिकार केवल चुनाव आयोग को ही है और इसमें कोई दखल नहीं दे सकता।

जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने भी इस मामले में दो टूक बात कहते हुए कहा कि अगर न्यायिक अधिकारियों को SIR की प्रक्रिया से संबंधित जानकारी चुनाव आयोग नहीं देगा तो और कौन देगा। उन्होंने कहा कि अदालत का आदेश दिन के उजाले की तरह बिल्कुल साफ है और राज्य सरकार तथा चुनाव आयोग दोनों को मिलकर इन अधिकारियों के काम के लिए अनुकूल माहौल बनाना चाहिए।

इस दौरान कपिल सिब्बल ने यह भी बताया कि राज्य की मुख्य सचिव भी अदालत में मौजूद हैं क्योंकि चुनाव आयोग द्वारा उनके खुद के मतदान के अधिकार पर सवाल उठाया जा रहा है।

अंत में पीठ ने निर्देश दिया कि राज्य के मुख्य सचिव चुनाव आयोग और न्यायिक अधिकारियों के साथ मिलकर SIR की प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा करें। सिब्बल ने यह भी मांग की कि 28 फरवरी को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद पूरक सूची भी जारी की जाए लेकिन अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि SIR की पूरी प्रक्रिया पहले से तय आदेशों के अनुसार ही होगी और इसमें कोई नया बदलाव नहीं किया जाएगा।

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