दशहरे के मौके पर गुजरात के भुज में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान को सख्त चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि सर क्रीक सेक्टर में पाकिस्तान लगातार सैन्य गतिविधियां बढ़ा रहा है और यह उसके इरादों को साफ दिखाता है। राजनाथ सिंह ने साफ कहा कि अगर पाकिस्तान ने यहां कोई दुस्साहस किया तो उसे ऐसा निर्णायक जवाब मिलेगा, जो इतिहास और भूगोल दोनों बदल सकता है।
पाकिस्तान की बढ़ती सैन्य मौजूदगी
रिपोर्ट्स के अनुसार, 2019 से पाकिस्तान सर क्रीक क्षेत्र में अपनी सैन्य ताकत को लगातार बढ़ा रहा है। उसने नई क्रीक बटालियन तैनात की है, साथ ही तटीय रक्षा नौकाएं और समुद्री आक्रामक नौकाएं भी लगाई हैं। रडार, मिसाइल और निगरानी विमानों की मदद से पाकिस्तान ने हवाई सुरक्षा भी मजबूत की है। भारत ने भी 2008 के मुंबई हमलों के बाद यहां सतर्कता बढ़ा दी थी। 2018 और 2019 में यहां लावारिस नावें मिलने के बाद भारत ने संभावित आतंकी खतरे को लेकर अलर्ट जारी किया था।
सर क्रीक क्या है?
सर क्रीक गुजरात और पाकिस्तान के सिंध प्रांत के बीच स्थित 96 किलोमीटर लंबी खारे पानी की पट्टी है। यह दलदली क्षेत्र कच्छ के रण में अरब सागर से मिलता है। यहां न तो पर्यटक आते हैं और न ही यह कोई दर्शनीय स्थल है, लेकिन इसकी अहमियत बेहद बड़ी है। यह इलाका दशकों से भारत और पाकिस्तान के बीच विवाद का केंद्र रहा है।
सर क्रीक की रणनीतिक अहमियत
सर क्रीक विवाद केवल कीचड़ और दलदल का मामला नहीं है, बल्कि इसमें मनी, मैप और मैरीटाइम डॉमिनेंस छिपा है। यहां तेल और गैस के बड़े भंडार मौजूद हैं और साथ ही समुद्री मछलियों की बड़ी मात्रा भी पाई जाती है। जिसके पास सर क्रीक का नियंत्रण होगा, उसे समुद्री संसाधनों पर अधिकार मिलेगा। इसके अलावा, अरब सागर में विशेष आर्थिक क्षेत्रों और समुद्री सीमाओं के निर्धारण में भी सर क्रीक अहम भूमिका निभाता है।

भारत-पाकिस्तान के दावे
इस विवाद की जड़ समुद्री सीमा की व्याख्या को लेकर है। आजादी के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच यह विवाद बना रहा। भारत का कहना है कि सीमा का निर्धारण थलवेग सिद्धांत के आधार पर नदी के मध्य से होना चाहिए। वहीं, पाकिस्तान का दावा है कि सर क्रीक सिंध का हिस्सा है और थलवेग सिद्धांत यहां लागू नहीं होता। कई दौर की बातचीत के बावजूद यह विवाद आज तक सुलझ नहीं सका है।
राजनाथ सिंह की चेतावनी के मायने
रक्षा मंत्री ने कहा कि भारतीय सेना हर परिस्थिति में देश की सुरक्षा के लिए तैयार है। उन्होंने 1965 के युद्ध का उदाहरण देते हुए याद दिलाया कि भारत लाहौर तक पहुंच चुका था। उन्होंने यह भी कहा कि कराची तक जाने का एक रास्ता सर क्रीक से होकर गुजरता है और पाकिस्तान को इसे याद रखना चाहिए। राजनाथ सिंह का यह बयान पाकिस्तान को कड़ा संदेश है कि भारत अब किसी भी उकसावे को हल्के में लेने वाला नहीं है।





















