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Thursday, January 15, 2026
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मद्रास हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, थिरुप्परंकुंड्रम पहाड़ी पर दीप जलाने की मिली अनुमति

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मद्रास हाई कोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने थिरुप्परंकुंड्रम पहाड़ी के निचले हिस्से में स्थित प्राचीन स्तंभ पर दीप जलाने की अनुमति दी है। यह क्षेत्र अरुलमिगु सुब्रमण्या स्वामी मंदिर का हिस्सा माना जाता है। कोर्ट ने कहा कि इस दीप प्रज्वलन से पास स्थित सिकंदर बादशाह दरगाह पर किसी भी तरह का असर नहीं पड़ेगा। जज ने स्पष्ट किया कि यह स्थान दरगाह के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है।

अदालत ने बताया कि पहाड़ी का निचला शिखर मंदिर से जुड़ा हुआ है। मस्जिद ऊपरी हिस्से में स्थित है और मंदिर का मुख्य क्षेत्र निचले हिस्से के आधार पर है। इसलिए दीप वाला स्थान मुस्लिम पक्ष के कब्जे में नहीं है। अदालत ने यह भी कहा कि इस तथ्य को 1920 के दशक के प्रिवी काउंसिल के फैसले ने भी मान्यता दी थी।

कोर्ट ने मंदिर प्रशासन को आदेश दिया कि कार्तिगई दीपम के अवसर पर दीपथून पर दीप जलाया जाए। अदालत ने कहा कि कार्तिगई प्रकाश का त्योहार है और घरों में हर जगह दीप जलते हैं। इसलिए दीपथून पर दीप जलाना परंपरा का हिस्सा होना चाहिए। अदालत ने मदुरै पुलिस आयुक्त को यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी कि आदेश के पालन में कोई बाधा न आए।

दरगाह प्रबंधन ने दावा किया था कि दीप जलाने से उनके अधिकार प्रभावित होंगे। हाई कोर्ट ने इस दावे को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि दरगाह पक्ष यह साबित नहीं कर सका कि दीप प्रज्वलन से किस तरह का नुकसान होगा। कोर्ट ने उलटे मंदिर प्रशासन को फटकार लगाई कि वह अपने अधिकारों की रक्षा को लेकर सक्रिय नहीं है।

अदालत ने कहा कि मंदिर के अधिकारों की रक्षा मंदिर प्रशासन का काम है। वर्तमान हालात में भक्तों और कार्यकर्ताओं को आगे आना पड़ रहा है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि धार्मिक अधिकारों और परंपराओं को सम्मान देना जरूरी है। इसलिए दीप जलाने की परंपरा जारी रहनी चाहिए और इसे किसी भी तरह रोका नहीं जाना चाहिए।

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