बांग्लादेश में छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद भड़की हिंसा ने एक दर्दनाक मोड़ ले लिया है। लक्ष्मीपुर सदर उपजिला में एक घटना में एक मासूम बच्ची को जिंदा जलाए जाने की खबर सामने आई है। स्थानीय मीडिया के अनुसार कथित तौर पर एक बीएनपी नेता के घर को बाहर से बंद कर आग लगा दी गई। इस आगजनी में उस बच्ची की मौत हो गई जबकि तीन अन्य लोग गंभीर रूप से झुलस गए।
कैसे हुई थी हादी की मौत?
इस हिंसा की पृष्ठभूमि में छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की रहस्यमय मौत है। बारह दिसंबर को ढाका के बिजोयनगर इलाके में एक चुनावी अभियान के दौरान नकाबपोश बंदूकधारियों ने हादी के सिर में गोली मार दी थी। गंभीर हालत में उन्हें इलाज के लिए सिंगापुर ले जाया गया था जहां गुरुवार को उनकी मौत हो गई।
कड़ी सुरक्षा में हुआ अंतिम संस्कार
बत्तीस वर्षीय हादी को शनिवार को ढाका विश्वविद्यालय परिसर की मस्जिद के पास दफनाया गया। उनकी कब्र राष्ट्रीय कवि काजी नजरुल इस्लाम की समाधि के ठीक बगल में बनाई गई। इस अंतिम संस्कार के दौरान भारी सुरक्षा बलों की तैनाती की गई थी। यह स्थान पहले से ही एक विवाद का केंद्र रहा है जहां एक धर्मनिरपेक्ष प्रतीक के पास एक कट्टरपंथी नेता को दफनाने को लेकर बहस चल रही है।
देशभर में फैली हिंसा और अराजकता
हादी की मृत्यु के बाद से बांग्लादेश के कई हिस्सों में हिंसक घटनाएं हो रही हैं। समर्थकों के गुस्से ने तोड़फोड़ और हमलों का रूप ले लिया है। गुरुवार को चटोग्राम में सहायक भारतीय उच्चायुक्त के आवास पर भी पत्थरबाजी की घटना हुई। हादी को भारत का कट्टर आलोचक माना जाता था।
इंकलाब मंच का सरकार को अल्टीमेटम
हादी की पार्टी इंकलाब मंच ने अंतरिम सरकार को चौबीस घंटे का अल्टीमेटम दिया है। शनिवार को शाहबाग चौराहे पर हजारों समर्थकों के सामने पार्टी नेताओं ने हादी के हत्यारों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर मांग पूरी नहीं हुई तो देशव्यापी आंदोलन शुरू कर दिया जाएगा। इससे स्थिति और अधिक तनावपूर्ण हो गई है।
हादी कौन थे और क्या थी उनकी योजना?
शरीफ उस्मान हादी जुलाई 2024 के सत्ता परिवर्तन आंदोलन का प्रमुख चेहरा थे। वह भारत की नीतियों के मुखर आलोचक के रूप में जाने जाते थे। हाल ही में उन्होंने घोषणा की थी कि वह ढाका-आठ सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर आगामी संसदीय चुनाव लड़ेंगे। उनकी हत्या ने चुनावी राजनीति को अनिश्चितता में धकेल दिया है।
स्मारक की मांग और राजकीय शोक
हादी के परिवार ने शाहबाग में एक स्मारक बनाने की मांग की है। यह वही स्थान है जहां से उनके नेतृत्व वाले आंदोलन की शुरुआत हुई थी। इस बीच यूनुस सरकार ने हादी की मौत पर एक दिन के राजकीय शोक की घोषणा की है। इस कारण ढाका और आसपास के इलाकों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं ताकि हिंसा और न फैले।




















