अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज लंबे समय तक बंद रहा तो वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें 200 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती हैं। यह चेतावनी एनर्जी रिसर्च फर्म वुड मैकेंजी की ताजा रिपोर्ट में दी गई है। इस स्थिति में न सिर्फ भारत बल्कि पूरी दुनिया आर्थिक मंदी की चपेट में आ सकती है।
होर्मुज स्ट्रेट क्यों इतना महत्वपूर्ण है?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया का सबसे क्रिटिकल एनर्जी चोकपॉइंट माना जाता है। यहां से रोजाना दुनिया के 20% से ज्यादा कच्चा तेल और बड़ा हिस्सा LNG (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) गुजरता है। फरवरी 2026 में शुरू हुए ईरान-संबंधित तनाव के बाद इस रूट पर यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
रिपोर्ट के मुख्य आंकड़े:
- खाड़ी देशों का 1.1 करोड़ बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल उत्पादन अभी ठप है।
- वैश्विक LNG सप्लाई का 20% हिस्सा प्रभावित।
भारत पर कितना बड़ा खतरा?
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है और अपनी ज़्यादातर ऊर्जा जरूरतें खाड़ी देशों से पूरी करता है। अगर कीमतें 200 डॉलर तक गईं तो भारत पर इसका असर व्यापक हो सकता है।
- पेट्रोल-डीजल के दाम आसमान छू सकते हैं।
- आम आदमी की रोजमर्रा की चीजें महंगी हो जाएंगी।
- रुपये पर और दबाव बढ़ेगा (डॉलर मजबूत होने से)।
- सरकार पर सब्सिडी का बोझ बढ़ेगा।
- महंगाई बढ़ने से RBI की ब्याज दर नीति भी प्रभावित हो सकती है।
वुड मैकेंजी के प्रमुख अर्थशास्त्री पीटर मार्टिन का कहना है कि “स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ग्लोबल एनर्जी मार्केट का सबसे महत्वपूर्ण चोकपॉइंट है। इसका लंबे समय तक बंद रहना सिर्फ ऊर्जा संकट नहीं, बल्कि व्यापक आर्थिक संकट पैदा कर सकता है।”
अभी क्या है स्थिति?
वर्तमान में भू-राजनीतिक तनाव के चलते तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। निवेशक और सरकारें दोनों ही इस स्थिति पर नजर रखे हुए हैं।
क्या करें आम आदमी?
- पेट्रोल-डीजल खर्च पर नजर रखें।
- जरूरत से ज्यादा वाहन उपयोग कम करें।
- आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतों में उतार-चढ़ाव की उम्मीद रखें।

















